एशिया में उच्च शिक्षा सस्ती होने के कारण इसे पश्चिमी देशों के शिक्षण संस्थानों के मुकाबले अधिक प्राथमिकता मिलती है पर गुणवत्ता के मामले में भारतीय शिक्षण संस्थान पिछड़ गए हैं।
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के आधार पर इस साल भारत के टॉप नौ शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग गिर गई हैं। इनमें भारत के छह आईआईटी शामिल हैं।
रैंकिग के अनुसार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) दिल्ली साल 2012 के 36वें रैंक के मुकाबले इस साल 38वें पर आ गया है। आईआईटी बॉम्बे की रैंक 34 से गिरकर 39 पर आ गई है और आईआईटी मद्रास 45वीं रैंक से गिरकर 49 पर आ गया है।
इसी तरह आईआईटी कानपुर की रैंक पिछले साल के मुकाबले 47 से 51 पर आ गई है। आईआईटी खड़गपुर दो रैंक नीचे गिरकर 58 पर है और आईआईटी रुड़की एक रैंक गिर 66 पर है।
क्यों गिरी रैंकिंग
क्यूएस वर्ल्ड के अनुसंधान प्रमुख बेन सॉटर के अनुसार रैंकिग घटने के पीछे का कारण भारतीय शिक्षण संस्थानों का शैक्षणिक स्तर गिरना, स्टूडेंट व फैकल्टी के बीच बढ़ता अंतर और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में कम भागीदारी है।
उनका कहना है कि आईआईटी लगातार शोध में लगी तो हुई हैं लेकिन विश्वस्तर पर इसका बहुत कम असर हो रहा है।
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी विश्वविद्यालयों को सालाना रैंकिंग देने वाला एक प्रतिष्ठित संस्थान है। यह विश्व के टॉप 700 विश्वविद्यालयों के लिए मेरिट लिस्ट जारी करता है, जो शोध, टीचिंग, रोजगार और अंतर्राष्ट्रीयकरण के आधार पर तय होती है। हांलाकि भारत सरकार का इस रैंकिंग से मतभेद हो सकता है।
भारत के 11 विश्वविद्यालय 300 की रैंकिंग में शामिल हैं। इनमें जापान की 71, चीन की 68 और कोरिया की 53 यूनिवर्सिटीज हैं।