जहां तकनीक का विकास बीमारियों के इलाज में सहायक बन रहा है वहीं इसने मुसीबतें भी खड़ी कर दी हैं। आलम यह है कि डॉक्टर, नर्स और तकनीशियन ऑपरेशन के दौरान भी अपने फोन का इस्तेमाल करते हैं।
आपको जानकर हैरानी होगी की वे फोन पर बात करते हैं, मैसेज करते हैं और ट्वीट्स भी चैक करते हैं।
हर्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के एक अध्ययन के अनुसार 43 फीसदी डॉक्टरों को मोबाइल से जुड़ी मानसिक समस्या होती है। 26 प्रतिशत को सोशल मीडिया की लत होती है। वे सर्जरी के दौरान भी सोशल मीडिया के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं।
अध्ययन के अनुसार 90 प्रतिशत नर्स और 50 प्रतिशत तकनीशियनों ने बताया कि वह सर्जरी के दौरान फोन पर बात करते हैं। हालांकि अधिकतर डॉक्टर्स ऑपरेशन करते हुए फोन पर बात नहीं करते लेकिन 10 प्रतिशत डॉक्टर मैसेज पढ़ते हैं।
दस प्रतिशत से कम ऑपरेशन थीयेटर(ओटी) टेक्नीशियन सर्जरी के दौरान ट्विट्स भी चैक करते हैं।
क्यों होता है ऐसा
एचसीएफआई के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि डॉक्टर्स को अपने फोन से दूर रहने पर चिंता और असुरक्षा महसूस होती है।
उन्होंने बताया डॉक्टर ओटी में नर्स या असिसटेंट के माध्यम से फोन पर बात करते हैं। अध्ययन में 87 डॉक्टर्स में से 70 फीसदी ने इस बात को स्वीकारा है।
क्या है डॉक्टर्स का कहना
अध्ययन में शामिल डॉक्टर्स ने बताया की वह इमरजेंसी कॉल में ऐसा करते हैं।
कुछ डॉक्टर्स का कहना था कि वे बोर होने के कारण मैसेज और सोशन नेटवर्किंग साइट इस्तेमाल करते हैं। कुछ डॉक्टर घर में सोशल मीडया का इस्तेमाल न कर पाने के कारण इसे ओटी में इस्तेमाल करते हैं।
इलैक्ट्रोमेगनेटिक रेडिशन का भी खतरा
फोन इस्तेमाल करने के खतरों के बारे में डॉक्टर्स बताते हैं की इससे केवल डॉक्टर का ध्यान भटकने का डर नहीं है बल्कि इससे इलैक्ट्रोमेगनेटिक रेडिएशन का खतरा भी रहता है।
यह समस्या केवल भारत या दिल्ली की नहीं है विदेशों में भी इस पर अध्ययन किया जा रहा है।