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मोदी के एबीसीडी फॉर्मूले पर जयराम रमेश ने कसा तंज

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी तंत्र के एबीसीडी ढर्रे पर कसे गए तंज पर तीखा पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि जब से भाजपा की सरकार केंद्रीय सत्ता में आई है उसी वक्त से देश 'नमो-संस्कृति' में जकड़ा हुआ है।
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रमेश ने बताया कि नमो-संस्कृति का मतलब है कि क्रिया नहीं सिर्फ संदेश। रमेश ने यह भी कहा कि मोदी का मतलब होता है Modi- Murder of Democratic India

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रमेश नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी पर तंज कस रहे थे जिसमें मोदी ने सरकारी तंत्र की एबीसीडी को समझाया था। मोदी ने कहा था कि सरकारी तंत्र एबीसीडी की तर्ज पर (एवाइड, बाईपास, कन्फ्यूज एंड डिले) काम करती है लेकिन अब इसे रोड (रिस्पांसिबिलिटी, ओनरशिप, अकाउंटिबिलिटी और डिसीप्लिन) की तर्ज पर अपनी कार्यप्रणाली को अंजाम देना चाहिए।

मोदी ने सोमवार को मेक इन इंडिया की एक दिन की वर्कशॉप में बोलते हुए कहा था कि सरकारी कार्यप्रणाली पूरी तरह से चरमरा गई है। उन्होंने कहा था, "सरकारी कार्यप्रणाली ऊपर से लेकर नीचे तक एबीसीडी कल्चर में जकड़ी हुई होती है।"
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संशोधन बिल पर जयराम को एतराज, ममता भी खफा

यूपीए सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने अध्यादेश के जरिए भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन करने के फैसले का कड़ा विरोध किया था। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री साफ साफ शब्दों में कह दिया है कि वो अपने राज्य में भूमि अधिग्रहण के संशोधनों को लागू नहीं करेगी।

ममता बनर्जी ने कहा कि यह अध्यादेश एक "काला अध्यादेश" और "अन्याय" है। ममता ने कहा, 'वो आपकी जमीन बंदूक की नोक पर छीन लेगें। मै इसको चुनौती देती हूं मैं इसे बंगाल में लागू नहीं करुंगी। उन्हें इसके लिए मेरी लाश के ऊपर से होकर गुजरना होगा।'

खड़गपुर में एक कॉलेज ग्राउंड में रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि मोदी सरकार में स्थितियां आपातकाल से भी बुरी हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार देश भर में लोकतंत्र पर बुल्डोजर चला रही है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में भूमि अधिग्रहण बिल में कुछ संशोधन पेश किए हैं। इन संशोधनों के तहत सस्ते आवासों के निर्माण औद्योगिक गलियारे बनाने एवं पीपीपी मॉडल पर सामाजिक उद्देश्य के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए भी जमीनों का अधिग्रहण किया जा सकेगा।
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