अपने गुरू स्वामी शंकरदेव की गुमशुदगी की जांच सीबीआई को सौंपे जाने को लेकर योग गुरू बाबा रामदेव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। हालांकि रामदेव ने अपने गुरू की गुमशुदगी के मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि एक शिष्य के लिए गुरू बहुत महत्वपूर्ण होता है, अगर गुरूदेव की गुमशुदगी की जांच सीबीआई करती है तो यह सराहनीय कदम है।
रामदेव ने पत्रकारों से कहा, 'हमारे गुरू की तलाश अगर सीबीआई करती है तो हमें इस बात की खुशी है। हम इस जांच का स्वागत करते हैं, लेकिन यह जांच निष्पक्ष होगी, हमें इस बात का भरोसा नहीं है।' उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच की मांग संतों की तरफ से नहीं उठाई गई है। रामदेव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इतने बड़े-बड़े घोटाले देश में हुए और हो रहे हैं, लेकिन उनकी जांच सीबीआई से क्यों नहीं कराई जा रही।
योग गुरू ने कहा कि जबसे उन्होंने काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है, तभी से केंद्र की जांच एजेंसियां उनके पीछे पड़ी हैं। आचार्य बालकृष्ण के मामले में सीबीआई का दुरुपयोग किया गया। गुरुदेव की गुमशुदगी के मामले में सीबीआई का किस तरह का दुरुपयोग किया जाएगा, अभी नहीं बताया जा सकता।
रामदेव ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने स्वामी शंकरदेव की गुमशुदगी के लिए सीबीआई जांच की सिफारिश की है, यह सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर गुजारिश करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज की निगरानी में एक जांच आयोग बने जो आचार्य बालकृष्ण, स्वामी शंकरदेव और हमारे ट्रस्टों की जांच करे। उन्होंने कहा कि लालबहादुर शास्त्री, सुभाष चंद्र बोस और डॉक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी की मौत की जांच क्यों नहीं होती। रॉबर्ट वाड्रा के पिता की मौत की जांच क्यों नहीं होती।
गौरतलब है कि रामदेव के गुरू शंकरदेव जुलाई 2007 से लापता बताए जाते हैं। लंबी पड़ताल के बाद पुलिस ने इस मामले में अप्रैल 2012 में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। मामले को लेकर समय-समय पर तरह-तरह के आरोप लगते रहे। विवाद को देखते हुए मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश करने का निर्देश दिया।
इसी क्रम में शुक्रवार को प्रमुख सचिव गृह ने (दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 के तहत) सीबीआई से जांच कराए जाने की सिफारिश की अधिसूचना जारी की। प्रमुख सचिव ने कहा कि राज्य पुलिस इस मामले में किसी नतीजे पर नहीं पहुंची, इसलिए यह मामला सीबीआई को रेफर कर दिया गया है।
कब क्या हुआ
-14 जुलाई 2007 को बाबा रामदेव के गुरु स्वामी शंकरदेव कनखल स्थित कृपालु बाग आश्रम से बिना बताए कहीं चले गए थे।
-दो दिन तक तलाश के बाद बाबा रामदेव केसहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने कनखल थाने में 16 जुलाई को गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
-पुलिस ने लंबी पड़ताल की। समय-समय पर जांच अधिकारी बदलते रहे। पांच साल तक आश्रम और उनके परिचितों से जुड़े दर्जनों लोगों के बयान दर्ज किए गए।
-10 अप्रैल 2012 को विवेचक सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
-फाइनल रिपोर्ट में विवेचक की ओर से कहा गया कि लंबी जद्दोजहद और प्रयासों के बावजूद स्वामी शंकरदेव का कोई पता नहीं चल पाया। इस केस में अब और ज्यादा समय लगाना मुनासिब नहीं होगा। पांच साल की तलाश के बाद भी पुलिस के हाथ खाली ही रहे।