बाबा रामदेव के छत्तीसगढ़ में आयोजित योग दीक्षा कार्यक्रमों का खर्च संबंधित क्षेत्रों से चुनाव लड़ने वाले भाजपा प्रत्याशियों के खर्च में जोड़ा जा सकता है।
चुनाव आयोग ने मतदाता जागरूकता के नाम पर आयोजित इन कार्यक्रमों में रामदेव द्वारा कांग्रेस पार्टी व नेताओं को निशाना बनाए जाने और मोदी की प्रशंसा करने को लेकर मिली शिकायतों के आधार पर यह फैसला लिया है।
आयोग की ओर से छत्तीसगढ़ के सीईओ को जरूरी कार्रवाई के लिए जल्द ही निर्देश भेज दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में तीन से आठ अक्तूबर के बीच रामदेव ने 15 स्थानों पर योग दीक्षा शिविर का आयोजन किया था। इन शिविरों के आयोजन की अनुमति यह कहकर ली गई थी कि रामदेव यहां आम मतदाताओं को चुनाव के लिए जागरूक करेंगे।
मोदी की जमकर की थी तारीफ
राज्य में नेता विपक्ष कांग्रेस विधायक रवींद्र चौबे और स्वाभिमान मंच ने रामदेव के कार्यक्रमों की वीडियो पेश करते हुए शिकायत की थी कि इन कार्यक्रमों में भाजपा के पक्ष में रामदेव ने प्रचार किया।
रामदेव ने कार्यक्रम में जहां केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार, सोनिया गांधी व राहुल गांधी पर निशाना साधा था वहीं, उन्होंने अपने संबोधनों में मोदी की जमकर तारीफ की थी।
सीईओ ने सही पाई शिकायत
छत्तीसगढ़ के सीईओ सुनील कुमार कुजूर ने मामले की छानबीन के बाद रामदेव के खिलाफ शिकायत को सही पाया था। उन्होंने कहा था कि रामदेव के कार्यक्रमों पर हुए खर्च को छत्तीसगढ़ भाजपा के चुनावी खर्च में जोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने शिकायत संबंधी सभी तथ्य केंद्रीय चुनाव आयोग को फैसला लेने के लिए भेज दिया था।
जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग ने भी रामदेव के खिलाफ शिकायतों को सही माना है किंतु योग दीक्षा कार्यक्रम के खर्च को उन्होंने पार्टी के बजाय संबंधित क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले भाजपा प्रत्याशियों के चुनाव खर्च में जोड़े जाने का सुझाव दिया है।
फैसले पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ के मुख्य चुनाव अधिकारी सुनील कुमार कुजूर से जब इस फैसले पर अमल के बारे में अमर उजाला ने पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें अभी आयोग का कोई पत्र नहीं मिला है। पत्र मिलने के बाद ही वे कोई टिप्पणी करेंगे।
जानकार यह सवाल उठा रहे हैं कि जब रामदेव कार्यक्रम की अवधि में भाजपा या किसी अन्य दल ने अपने प्रत्याशी नहीं घोषित किए थे तब वह खर्च बाद में अधिकृत प्रत्याशियों के चुनाव खर्च में कैसे जोड़ा जा सकता है।