दलित आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाली झज्जर के गांव छारा की छोरी राखी बिरला दिल्ली में आप की कैबिनेट में सबसे कम उम्र की मंत्री बन गई हैं। राखी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का प्रभार मिला है।
पेशे से पत्रकार रहीं राखी बिरला ने 26 साल की उम्र में साधारण परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद दिल्ली की मंगोलपुरी सीट से कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान को 10585 वोटों से पटखनी दी।
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माता-पिता की अनचाही संतान
राखी विरला अपने माता-पिता की अनचाही संतान हैं। तीन भाई बहनों के बाद उनके मां-बाप नहीं चाहते थे कि आगे उनकी कोई औलाद हो और शायद इसलिए उन्होंने गर्भपात की पूरी कोशिश भी की।
राखी के पिता भूपेंद्र सिंह बिधलान का कहना है कि डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने राखी की मां शीला को अबॉर्शन की दवाइयां भी दीं लेकिन फिर भी राखी बच गई।
पहली बार राखी ने गर्भ में ही अपनी मजबूत इच्छाशक्ति दिखा दी थी। राखी को खुद को क्रांतिकारी कहना अच्छा लगता है।
गलती से नाम पड़ा बिरला
साधारण से परिवार में शीला एवं भूपेंद्र सिंह बिधलान के यहां जन्मी राखी अपनी चार बहनों में सबसे छोटी है। वैसे तो उनका गोत्र बिधलान है, लेकिन बिधलान से बिरला बनने तक का किस्सा भी काफी रोचक है।
बताते हैं कि दसवीं की उनकी बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान एक अध्यापक ने फार्म भरने के दौरान भूलवश बिधलान के स्थान पर बिरला लिख दिया, जो अब उनकी पहचान बन गया है।
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न्यूज चैनल में कर चुकीं हैं काम
जनसंचार में स्नातकोत्तर (एमए) तक पढ़ाई करने वाली राखी बिरला दिल्ली के न्यूज चैनल में भी काम कर चुकी है और उनका परिवार पहले कांग्रेस का समर्थक था लेकिन 2011 में जनलोकपाल को लेकर अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान परिवार ने कांग्रेस से किनारा कर लिया।
इसके बाद वे इसी जन मुहिम से जुड़ गए। पहले ही चुनाव में राजकुमार चौहान जैसे बड़े दिग्गज को पटखनी देने और जन आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने की वजह से राखी को मंत्रिमंडल में जगह मिल रही है।