इन दिनों दिल्ली और देश के दिलोदिमाग में पर कोई एक नाम छाया है, तो वह अरविंद केजरीवाल। दिल्ली के नए मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल दिखने में बेहद आम नजर आते हैं और जनता से जुड़ने का उनका तरीका अब तक सौ फीसदी कारगर साबित हुआ है।
यह भी साफ है कि केजरीवाल अपने साथ ऐसी राजनीति लेकर आए हैं, जो पारंपरिक नेताओं की सियासत से काफी अलग है। ऐसा नहीं है कि वह अपने भाषणों से विरोधियों पर हमला नहीं बोलते, लेकिन उनके हमले अलग किस्म के हैं, जो अपने में आम आदमी की तासीर लिए हुए हैं।
केजरीवाल के कुछ डायलॉग आम होते हुए भी उन्हें काफी शोहरत दे गए। आइए नजर डालें ऐसे ही कुछ डायलॉग जिनके दम पर केजरीवाल ने दिल्ली और देश को अपना दीवाना बना डाला।
'मैं कोई भूत-प्रेत नहीं हूं'
जब से अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली का तख्त संभाला, कहा जाने लगा कि अब भ्रष्ट अधिकारियों की खैर नहीं। इसकी वजह से ईमानदार अफसरशाही भी दहशत में आ गई। केजरीवाल ने इसे समझा और बहुत जल्द साफ कर दिया कि वह ऐसा कुछ नहीं करने जा रहे।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को सचिवालय में दिल्ली सरकार के अधिकारियों को दो टूक कहा, ‘डरें नहीं। मैं कोई भूत-प्रेत नहीं हूं। किसी के पीछे नहीं पड़ूंगा। ज्यादातर लोग ईमानदार हैं। ईमानदारी से काम करें। अगर पहले कभी गलती हुई है तो उसे पीछे छोड़कर आगे बढ़ें। जो गलतियां पहले हुई हैं, उसे बाद में सोचेंगे क्या करना है।’
केजरीवाल ने कहा कि जनता, राजनेता और ब्यूरोक्रेसी मिल जाएं तो दुनिया के सामने मिसाल पेश कर सकते हैं। अभी तक ईमानदारी से काम करने वालों को साइड लाइन कर दिया जाता था। यह परंपरा खत्म होगी जो ईमानदारी से काम करेगा, उसे रिवार्ड मिलेगा।
'कोई रिश्वत मांगे, तो मना मत करना!'
शपथ लेने के बाद रिश्वत और भ्रष्टाचार को लेकर केजरीवाल ने काफी बातें कहीं। लेकिन जब बात रिश्वत को आई, तो उन्होंने इस अंदाज में अपनी राय सामने रखी कि एक बार तो सभी हैरत में पड़ गए थे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कोई रिश्वत मांगे तो मना मत करना...। उससे सेटिंग कर लेना। हम एक फोन नंबर देंगे। उस पर फोन करके इस बात की जानकारी दे देना। उसे पकड़वा देना। और आपका काम मैं करवाऊंगा।
उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि आने वाले पांच साल में यह देश एक बार फिर सोने की चिड़िया कहलाएगा। हम सभी को मिलकर दिल्ली को बदलना है। हमें कसम खानी है कि हम कभी रिश्वत नहीं लेंगे और न देंगे।"
'मुझे नहीं, फिक्र दूसरों को है'
अरविंद केजरीवाल से जब चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार पूछा जा रहा था कि अगर वह हार गए, तो क्या करेंगे? तो केजरीवाल आत्मविश्वास के साथ जवाब देते थे कि अगर वह नहीं जीते, तो सोचना दिल्ली की जनता को है कि वह क्या करेगी।
उन्होंने जीत और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अपना अंदाज नहीं छोड़ा। केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि प्रस्ताव पास हो जाएगा, कोई कह रहा है कि गिर जाएगा। यह बहुत छोटी बात है। हम जनता की सेवा में लगे रहेंगे।
केजरीवाल ने कहा कि दोबारा चुनाव हुए तो जनता आप को बहुमत देगी। हम सत्ता के लिए नहीं आए, पैसे के लिए नहीं आए। हमें चिंता नहीं है। हां, दूसरे राजनीतिक दलों में चिंता जरूर है।
'हमें घमंड नहीं, सेवा करनी है'
अरविंद केजरीवाल सीख देने के मामले में केवल जनता और दूसरे नेताओं को ही नहीं चुन रहे, बल्कि कदम-कदम पर अपनी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों भी सबक देने से नहीं चूक रहे।
शपथ लेने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा, "मैं अपने साथियों से आग्रह करता हूं कि हमें मन में कभी घमंड नहीं करना है। आम आदमी पार्टी का जन्म दूसरे राजनीतिक दलों का घमंड तोड़ने के लिए हुआ है, कहीं ऐसा न हो कि आम आदमी पार्टी का घमंड तोड़ने के लिए किसी दूसरी पार्टी को जन्म लेना पड़े।
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं से भी यही आग्रह कि जब वे अपने इलाकों में जाएंगे, तो घमंड नहीं करना है। सेवाभाव रखना है, क्योंकि हमें जनता की सेवा करनी है।
'गुमान नहीं कि सारा दिमाग हमारे पास है'
जीत कई बार नेताओं के सिर घुमा देती है, लेकिन केजरीवाल इस बात का ध्यान बखूबी रखे हुए हैं कि दिल्ली की जीत उन्हें अपनी राह से न भटका दे। यह बात उन्होंने जनता के सामने भी मानी और साफ कर दिया कि उन्हें इस बात का जरा गुमान नहीं।
केजरीवाल ने कहा, "हमारे पास हर समस्या का समाधान हो, यह जरूरी नहीं है। हमें यह गलतफहमी भी नहीं है कि दुनिया की सारी अक्लमंदी हम लोगों के पास हैं।"
उन्होंने कहा, "हम यह दावा नहीं कर सकते कि सरकार बनते ही दिल्ली की सारी दिक्कतें छूमंतर हो जाएंगी। लेकिन यह जरूरत पता है कि दिल्ली की डेढ़ करोड़ आबादी अगर एक हो गई, तो हर समस्या का हल मिल जाएगा।"
'मेरे पास जादू नहीं, जनता की छड़ी'
पारंपरिक राजनीति और भ्रष्ट नेताओं से आजिज आई जनता को केजरीवाल के चेहरे में अपनी हर समस्या का समाधान दिखने लगा है। लेकिन दिल्ली के नए मुख्यमंत्री जनता से सिस्टम बनाने के लिए मोहलत मांग रहे हैं और उनका दिल जीतने की कोशिश में भी हैं।
उन्होंने कहा, "हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, लेकिन जनता की छड़ी जरूर ह। आज सरकार बनेगी और कल सभी समाधान मिल जाएंगे, ऐसा नहीं है। लेकिन यह विश्वास है कि दिल्ली की डेढ़ करोड़ आबादी अगर एक हो गई, तो हर समस्या का हल मिल जाएगा। डेढ़ करोड़ लोग मिलकर सरकार बनाएंगे और वही सरकार चलाएंगे।"
केजरीवाल ने कहा कि आज बड़ा खास दिन है और बदलाव की शुरुआत हो रही है। लेकिन यह शुरुआत भर है और हमें लंबा सफर तय करना है।
'राजनीति गंदा कीचड़, खुद साफ करनी होगी'
जन लोकपाल से जुड़े आंदोलन से सुर्खियों में आए अरविंद केजरीवाल ने पहले दावा किया था कि वह राजनीति में नहीं उतरेंगे। उनके गुरु अन्ना हजारे भी इसी बात के पक्षधर थे, लेकिन केजरीवाल ने अपनी रणनीति को बदला, तो इसके पीछे की वजह भी बताई।
दिल्ली के नए सीएम ने कहा, "अन्ना ने 13 दिन यहीं अनशन किया था। लेकिन यह साफ हो गया कि जब तक राजनीति नहीं बदलेगी, देश में सुधार नहीं होगा। अन्ना समझाया करते थे कि राजनीति गंदी कीचड़ है और मैं कहा करता था कि राजनीति में उतरकर सफाई करनी होगी।"
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री और छह लोगों ने मंत्रियों की शपथ नहीं ली है, बल्कि दिल्ली की जनता, दिल्ली के हर आम आदमी ने मुख्यमंत्री और मंत्री पद की शपथ ली है।