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दागी सांसदों और विधायकों को राज्यसभा की क्लीन चिट

Wed, 28 Aug 2013 12:03 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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दागी सांसदों और विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला लागू नहीं हो सकेगा। उनकी सदस्यता बरकरार रहेगी। दागी नेता जेल से भी चुनाव लड़ सकेंगे।
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राजनीति के अपराधीकरण को रोकने की दिशा में अहम माने जा रहे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को माननीयों ने पलट दिया है।

इस संबंध में जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन के प्रस्ताव को मंगलवार को राज्यसभा से मंजूरी मिल गई। जल्द ही लोकसभा से भी इस विधेयक को हरी झंडी मिल जाएगी।

संशोधित बिल को संसद की मंजूरी मिलने के बाद इसे 10 जुलाई, 2013 से प्रभावी माना जाएगा। दरअसल सर्वोच्च न्यायालय ने इसी दिन यह फैसला दिया था कि जेल से सांसद चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।
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नए विधेयक के मुताबिक अगर किसी दागी सांसद या विधायक की सजा के खिलाफ अपील की जा चुकी है या उसकी सजा पर रोक लगा दी गई है तो सदस्यता खारिज नहीं होगी।

इस दौरान सदस्य संसद या विधानसभा के सभी कार्यकलापों में हिस्सा लेते रहेंगे। जेल जाने वाले व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल रहेगा और वे चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि किसी मुकदमे में दोषी साबित होने और सजा होते ही सांसदों और विधायकों की सदस्यता खत्म हो जाएगी।

सर्वोच्च न्यायालय की ओर से यह फैसला प्रभावी होने के बाद सभी दलों के समर्थन के साथ राज्यसभा में इस फैसले को बदलने के लिए कानून में संशोधन का प्रस्ताव पास किया गया है। इसलिए लोकसभा से भी इसे मंजूरी मिलने में देर होने की उम्मीद नहीं है।

कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने संशोधित विधेयक पर चर्चा के जवाब में कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा की है और उसके बाद पुनर्विचार याचिका दायर की गई है।

लेकिन सरकार का मानना है कि पुनर्विचार याचिका का निर्णय आने से पहले सामने खड़ी हो रही समस्याओं से ठीक ढंग से निपटने की जरूरत है।

सिब्बल ने कहा कि अदालत का फैसला गलत था और उसे राजनेताओं पर फैसला देने में सावधानी बरतनी चाहिए। विधेयक पर चर्चा के दौरान राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण और इसके प्रति जनाक्रोश पर सभी दलों के सदस्यों ने चिंता जताई।

देश में आमतौर पर लोगों में यही नकारात्मक सोच है कि सभी नेता अपराधी हैं। भले ही हम (नेता) अपराधी न हों, लेकिन अदालतें भी हमें अपराधी साबित करने के लिए उत्साहित हैं।--कपिल सिब्बल, कानून मंत्री

सर्वोच्च अदालत के फैसले से चुनाव लड़ने को इच्छुक प्रत्याशी के भाग्य का फैसला करने में पुलिस को ज्यादा सशक्त बना दिया गया है। कौन व्यक्ति चुनाव लड़ेगा और कौन मैदान से बाहर हो जाएगा? इसका निर्णय पुलिस पर छोड़ना ठीक नहीं है।--अरुण जेटली, राज्यसभा में विपक्ष के नेता
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यह विधेयक अपराधियों को बचाने के लिए नहीं है। बल्कि उनके लिए है जो अपराधी नहीं हैं, फिर भी उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है।--सतीश चंद्र मिश्र, बसपा
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