यूपीए सरकार ने माना है कि किसानों की कर्ज माफी योजना में करोड़ों की गड़बड़ी हुई है और अब तक 230 करोड़ रुपये की गड़बड़ी साबित भी हो चुकी है।
मंगलवार को राज्यसभा में वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा देते हुए कहा कि इतनी बड़ी योजना के क्रियान्वयन में ऐसी गड़बड़ियां हो जाती हैं।
राज्यसभा में प्रश्न काल के दौरान चिदंबरम ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद कई एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं। किसी को यह नहीं समझना चाहिए कि इस मामले के दोषियों को बचाया जा रहा है।
चिदंबरम के मुताबिक हालांकि यह गड़बड़ी बहुत छोटी है, लेकिन इस गलती में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चिदंबरम ने जानकारी दी कि 2008 में लागू किसान कर्ज माफी की इस योजना में 52,269.86 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इससे देश भर के 3.73 करोड़ किसानों को लाभ हुआ।
चिदंबरम ने कहा कि कैग ने इन गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित किया था।
इस आधार पर नाबार्ड और रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी संबंधित संस्थाओं से इसकी जांच करने को कहा। चिदंबरम के मुताबिक नाबार्ड और आरबीआई अपने स्तर पर भी इस मामले की जांच कर रही है।
किसानों की कर्ज माफी की इस योजना को यूपीए-1 का वह चुनावी पांसा समझा जाता है, जिसने 2009 के चुनाव में उसका बेड़ा पार लगाया था।