भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह अपनी कार्यकारिणी के साथ ही सभी मोर्चों के अध्यक्षों के नामों का भी ऐलान करेंगे। पार्टी के छह मोर्चों में से अकेले अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष फगन सिंह कुलस्ते की दोबारा ताजपोशी लगभग तय मानी जा रही है, जबकि भाजयुमो के मौजूदा अध्यक्ष अनुराग ठाकुर समेत बाकी पांच मोर्चा के लिए नए नाम तलाशे जा रहे हैं। पार्टी के प्रकोष्ठों के अध्यक्षों के नाम बाद में तय किए जाएंगे।
भाजपा के कुल छह मोर्चे हैं। महिला, युवा, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अल्पसंख्यक और किसान मोर्चा। महिला मोर्चा की कमान अभी अभिनेत्री स्मृति ईरानी के पास है। सूत्रों के अनुसार राजनाथ सिंह उनकी जगह पार्टी सांसद करुणा शुक्ला को कमान सौंपने के पक्ष में हैं। करुणा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भांजी हैं। उनके अलावा दिल्ली की पूर्व मेयर आरती मेहरा के नाम भी विचार हो रहा है। वैसे पार्टी का एक खेमा ईरानी को पद पर बनाए रखने के लिए कोशिश कर रहा है।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर की विदाई तय है। हालांकि भाजयुमो के लिए अभी तक कोई दमदार नाम सामने नहीं आया है। किसान मोर्चा से ओमप्रकाश धनकड़ का जाना तय है। उनकी जगह कृष्ण पाल गुजर और रामचंद्र बैंडा के नाम चर्चा में हैं। अल्पसंख्यक मोर्चा के लिए मौजूदा उपाध्यक्ष अब्दुल रशीद का नाम चल रहा है। हालांकि मौजूदा अध्यक्ष तनवीर अहमद को दोबारा कमान सौंपे जाने की भी कोशिशें हो रही हैं। माना जा रहा है कि इन दोनों में से किसी एक को ही कमान सौंपी जाएगी।
अनुसूचित जाति मोर्चा के लिए अशोक प्रधान का नाम लगभग तय माना जा रहा है। प्रधान लोकसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन से पहले खुर्जा से सांसद चुने जाते थे। इसलिए मौजूदा अध्यक्ष दुष्यंत कुमार गौतम की विदाई तय है। अनुसूचित जनजाति मोर्चा के लिए मौजूदा अध्यक्ष फगन सिंह कुलस्ते की दोबारा ताजपोशी तय मानी जा रही है।
भाजपा कुलस्ते समेत तीन सांसदों को व्हिसल ब्लोअर के तौर पर पेश करती रही है। पिछली लोकसभा में परमाणु करार संबंधी विधेयक को पारित कराते समय सदन में कथित घूस के तौर पर मिले तीन करोड़ रुपये लेकर आने वालों में कुलस्ते भी शामिल थे। उनका आरोप था कि सरकार ने अपने पक्ष में मतदान करने के लिए यह रकम दी थी। इसलिए कुलस्ते का पद पर बने रहना तय माना जा रहा है।