फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुषमा, वसुंधरा की तरह शिवराज के तारणहार नहीं बन पाए राजनाथ

विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की तरह ही व्यापम घोटाले के सियासी भंवर में घिरे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का बचाव नहीं कर पाए।
विज्ञापन


गृह मंत्री की सरकार की ओर से व्यापम घोटाले की सीबीआई जांच न कराने की घोषणा के अगले ही दिन खुद मुख्यमंत्री चौहान को इस आशय की घोषणा करनी पड़ी।

दरअसल, राजनाथ इस मामले में अपनी दलीलों से पार्टी नेतृत्व के साथ-साथ संघ को संतुष्ट नहीं कर पाए। खासतौर पर एक टीवी चैनल के एक पत्रकार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद मामले के राष्ट्रीय स्तर पर छा जाने के कारण पार्टी और संघ के बीच सीबीआई जांच पर सहमति बन गई।

पार्टी और संघ को इस बात का भी डर था कि अगर नौ जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिकूल टिप्पणी के साथ जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया तो विपक्ष के तीखे हमलों का वार झेलना मुश्किल होगा।
विज्ञापन


दिलचस्प तथ्य यह है कि इससे पहले ललित मोदी की मदद के सवाल पर घिर कर अलग-थलग पड़ीं वसुंधरा और सुषमा के बचाव में राजनाथ ने ढाल का काम किया था।

राजनाथ न केवल संघ को साधने में कामयाब हुए थे, बल्कि इसके बाद पार्टी भी इनके बचाव में खड़ी हुई थीं। हालांकि, तब केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को उन्हें बराबर साथ मिला था।
विज्ञापन

मगर इस बार विरोधी राजनाथ पर पड़ रहे भारी

सूत्रों के मुताबिक इससे पहले ललित मोदी की मदद के आरोपों से घिरे नेताओं के बचाव में एक गुट ने संघ नेतृत्व के समक्ष सरकार और पार्टी में विरोधी गुट को निशाना बनाए जाने की दलील दी थी।

तब संघ ने भी संतुलन कायम रखने के लिए इस दलील को न केवल स्वीकार किया था, बल्कि इन नेताओं के बचाव में भी उतर आया था।

खासतौर पर सुषमा के आरोपों से घिरने के तत्काल बाद पार्टी के एक सांसद की पूरे मामले में आस्तीन के सांप का हाथ होने की दलील और दूसरे सांसद की भगोड़े की मदद पर उठाए गए सवाल ने भी पार्टी के अंदर के खींचतान को जाहिर कर दिया था। पार्टी में चर्चा है कि तब राजनाथ अपने विरोधियों पर भारी पड़े थे, मगर इस बार विरोधी खेमा उन पर भारी पड़ गया।

विचित्र संयोग पर पार्टी में चर्चा
मोदी सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर एक गुट विशेष के नेताओं के आरोपों से घिरने के विचित्र संयोग पर नए सिरे से चर्चा शुरू हुई है।

आरोपों से घिरीं सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे, रमन सिंह और शिवराज सिंह चौहान पार्टी के एक विशेष गुट से जुड़े रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे महाराष्ट्र सरकार के दो मंत्री पंकजा मुंडे और विनोद तावड़े को भी केंद्रीय आलाकमान की पसंद देवेंद्र फडणवीस के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखा जाता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें