राजस्थान में प्रचंड बहुमत से विधानसभा और लोकसभा चुनाव जीतने वाली भाजपा का उप चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन पार्टी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं कांग्रेस अपने प्रदर्शन से उपजे उत्साह को बनाए रखना चाहती है।
अब दोनों ही पार्टियों की नजरें करीब डेढ़ महीने बाद जयपुर सहित 46 स्थानों पर होने वाले निकाय चुनावों पर टिकी हुई हैं।
भाजपा निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के जरिए वापस फ्रंटफुट पर आना चाहती है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में बचे-खुचे निराशाजनक माहौल से पूरी तरह उबरने को आतुर है।
सूत्रों के अनुसार भाजपा और कांग्रेस दोनों ही निकाय चुनावों को देखते हुए वार्ड वार रणनीति तैयार करने में जुटीं हुईं हैं। उप चुनाव के परिणामों ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित पार्टी पदाधिकारियों की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था।
फिर आमने-सामने होंगे बीजेपी-कांग्रेस
इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को ये उप चुनाव उत्साहविहीन कांग्रेस को फिर संगठित करने के लिए लिए रोशनी दे गया।
सचिन पायलट ऐसी रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिससे कार्यकर्ता इन निकाय चुनाव में ही नहीं, बल्कि साल-दर-साल उत्साहित रहें। वे पार्टी के कार्यक्रम इस तरह से बुनना चाहते हैं, जिससे कार्यकर्ता हमेशा एक्टिव रहें।
पायलट ने इस रणनीति को लेकर पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा भी की है। जल्द ही निकाय चुनावों की तैयारी के लिहाज से नए कार्यक्रम लाए जा सकते हैं।
सचिन का मानना है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव में फिर जीत हासिल करनी है, तो निकाय चुनाव के सहारे पार्टी कार्यकर्ताओं को उत्साहित एवं सक्रिय रखा जाए।
भाजपा के पक्ष में नहीं गए थे उपचुनाव
सूत्रों ने बताया कि सचिन सरल कार्यक्रम तैयार करना चाहते हैं, जिसे प्रत्येक कार्यकर्ता अपने-अपने जिलों में आसानी से चलाता रहे।
इधर, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी उप चुनाव के झटके से उबरने के लिए निकाय चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं का आह्वान कर चुकी हैं। उन्होंने उप चुनाव की निराशा से उबरने के लिए भाजपा की हार को स्वीकारते हुए आगे बढ़ने की सलाह दी है।
हार के बावजूद उन्होंने कार्यकर्ता के समर्पण और कर्मठता की तारीफ की। उन्होंने भी पार्टी अध्यक्ष अशोक परनामी और अन्य पदाधिकारियों को निकाय चुनाव की तैयारी जोर-शोर से शुरू करने को कहा है।