राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कहा है कि वह प्रदेश में बालिका शिक्षा को पूरी तरह नि:शुल्क करने और सरकारी सेवाओं में महिला आरक्षण 30 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने पर विचार करे।
अदालत ने तीन माह में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझनुं, सीकर और अलवर में पीसीपीएनडीटी मामलों की विशेष अदालतें आरंभ करने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी और न्यायाधीश प्रकाश गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश एस.के. गुप्ता की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने राज्य सकरार को अब तक दिए आदेशों की पालना रिपोर्ट 11 मई को पेश करने के आदेश दिए हैं।
यह भी दिए आदेश -
- अपंजीकृत सेंटर्स पर कार्रवाई कर सोनोग्राफी मशीनों को जब्त कर प्राधिकृत अधिकारी को सूचना दी जाए। मजिस्ट्रेट मामला लंबित रहने तक मशीनें नहीं छोड़े।
- सोनोग्राफी रिपोर्ट पर संबंधित चिकित्सक डिजीटल हस्ताक्षर के बजाए खुद हस्ताक्षर करें।
- मशीन निर्माता सोनोग्राफी सेंटर से पंजीकृत होने का प्रमाण पत्र लेकर ही मशीन बेंचे और इसकी सूचना प्राधिकृत अधिकारी को दें।
- सोनाग्राफी मशीन की लोकेशन ट्रेस करने के लिए हर सोनोग्र्राफी मशीन में जीपीएस सिस्टम लगाया जाए।
- निचली अदालतों में लंबित ट्रायल और रिविजन तीन माह में तय किए जाएं।
- सोनोग्राफी मशीनों में लगे एक्टिव ट्रेकर के लिए पर्याप्त संख्या में नियंत्रण कक्ष स्थापित कर उनकी मॉनिटरिंग के लिए नोडल अफसर की हो नियुक्ति।
- कन्याभू्रण हत्या से जुड़े अपराधों की जानकारी आमजन प्राधिकृत अधिकारी को दे सकते हैं। शिकायतें सही पाए जाने पर प्रोत्साहन राशि देने के लिए सरकार तीन माह में योजना बनाए।
- जहां पीसीपीएनडीटी की विशेष अदालतें नहीं हैं, वहां मजिस्ट्रेट ऐसे मामलों की सुनवाई करें।
- शादियों में खर्चा सीमित करने के लिए मापदंड तय किए जाएं।
- कन्या भू्रण हत्या को रोकने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाई जाए।