कहते हैं कि इंसान की जिंदगी और मौत पर उसका कोई अख्तियार नहीं होता। ये सब तो होता है ऊपरवाले के हाथ में और वही निर्धारित करता है कि किसको कितना जीना है और कब मर जाना है।
एक शख्स खुद के लिए मौत चाहता था, उसने मरने की कोशिशें भी कीं लेकिन शायद उसकी किस्मत में मौत नहीं जिंदगी लिखी थी और इसीलिए चार कोशिशों के बावजूद भी वो जिंदा बच गया।
उससे पहले नींद की गोलियां खाईं और फिर सल्फास, जब इससे भी उसे मौत नसीब ना हुई तो वो पटरियों पर जाकर लेट गया लेकिन वहां भी उसको मौत नहीं मिली। आगे की स्लाइडों में पढ़िए इस हिला कर रख देने वाली कहानी को।
लेकिन उसे नहीं मिली मौत!
राजस्थान के हिंडौन में रहता है गोपाल। वह एक नर्सिंग होम में वार्ड ब्वॉय का काम करता है और नशे का आदि है। वह दो बेटियों का पिता भी है और इस नशे की लत के कारण उसका परिवार प्रभावित हो रहा था।
स्थानीय अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक उसके घर में रोजाना कलह का माहौल रहता था। रोज-रोज की किचकिच से परेशान होकर गोपाल ने जान देने की ठान ली और चार बार अपनी जान देने की कोशिश कीं।
गोपाल ने पहले नींद को गोलियां खाईं लेकिन उन्होंने असर नहीं दिखाया, इसके बाद उसने सल्फाज खाई लेकिन उसने भी धोखा दे दिया। अब गोपाल मरने के लिए शराब पीकर रेल की पटरी पर जाकर लेट गया।
तो ऐसे बच गया गोपाल
ट्रेन आई तो जरूर लेकिन ड्राइवर की नजर उस पर पड़ गई। ड्राइवर ने ट्रेन रोकी और उसे उठा कर दूसरी जगह लेटा दिया। वह दूसरी पटरी पर जा लेटा लेकिन ट्रेन को सिग्नल नहीं मिला और उसे मौत नहीं मिली।
अब अस्पताल में वह अपने किए पर पछता रहा है और वादा कर रहा है कि आइंदा वह ऐसी कोशिशें नहीं करेगा। डॉक्टरों के मुताबिक उसने जो सल्फास खाई थी वह नई थी और इसी कारण उसकी जान बच गई।
अगर सल्फास पुरानी होती तो उसकी जान बचना तकरीबन असंभव था। साथ ही ट्रेन के ड्राइवर ने भी अगर उसे नहीं देखा होता तो भी वह बच नहीं पाता।