हाल ही में संपन्न हुए चुनावों के बाद श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिन्द्रा राजपक्षे ने सत्ता में बने रहने के लिए सेना से मदद मांगी थी। सेना के सहारे वह चुनाव परिणामों को धताते हुए सत्ता में बने रहना चाहते थे। लेकिन सेना प्रमुख द्वारा मदद से इंकार करने पर राजपक्षे ने हार स्वीकार करते हुए पद छोड़ दिया था।
यह सनसनीखेज आरोप लगाए हैं श्रीलंका के नवनियुक्त राष्ट्रपति मैत्रीपाला श्रीसेना के मुख्य प्रवक्ता ने। बीबीसी के अनुसार कोलंबों में पत्रकारों को संबोधित करते हुए मुख्य प्रवक्ता रजिथा सेनरत्ने ने आरोप लगाया कि पूर्व राष्ट्रपति ने चुनावों के नतीजे आने से पहले सेना के हाईकमान पर इसके लिए दबाव बनाने का प्रयास किया था।
यहां तक की चुनाव परिणाम से एक घंटे पहले तक भी वह इसी प्रयास में रहे और सेना प्रमुख जनरल दया रत्नायके पर हस्तक्षेप करने के लिए दबाव बनाया। लेकिन उन्होंने (सेना प्रमुख) ने किसी तरह के असवैंधानिक कार्य या चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया था।
सेनरत्ने के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे पद दोड़ना नहीं चाहते थे, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद उनके पास कोई चारा नहीं रहा। सेनरत्ने ने आरोप लगाया कि पूर्व राष्ट्रपति ने अपने छोटे भाई और रक्षा सचिव गोटभाया के सहारे अपने मंसूबों को परवान चढ़ाने का प्रयास किया था, वह तीसरी बार भी हर हाल में सत्ता में बने रहना चाहते थे।