रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आज मोदी सरकार का तीसरा और अपना दूसरा रेल बजट संसद में पेश किया। हालांकि उम्मीदों के विपरीत इस बार रेल किराया में कोई बढोत्तरी नहीं की गई। न ही सवारी किराए में और नहीं माल ढुलाए में, लेकिन इसको लेकर ज्यादा मुगालते में नहीं रहा जा सकता क्योंकि किराया बढ़ाने के लिए सरकारें अब बजट पर ही निर्भर नहीं हर गई हैं।
बीते बजट में भी सरकार ने किसी तरह का रेल किराया बढ़ाने की घोषणा नहीं की थी बावजूद इसके सालभर यात्रियों को झटके पर झटके लगते रहे। सालभर में रेलवे ने रेल बजट के बाद बिना बताए ही तमाम तरह के किरायों में तो वृद्धि की ही तत्काल जैसी जरूरी सुविधा को भी दूधारू गाय की तरह इस्तेमाल किया।
इसके अलावा प्रीमियम तत्काल के नाम पर तो जमकर लोगों की जेब काटी गई। आइए डालते हैं एक निगाह उन झटकों पर जो सुरेश प्रभु की रेल ने आम आदमी को दिए।
तत्काल के नाम पर सालभर कटती रही जेब
बीते रेल बजट में सुरेश प्रभु ने प्रीमियम तत्काल की घोषणा की थी। उस समय इसका मकसद रेलवे और यात्रियों के बीच बढ़ते दलालों और मुनाफाखोरी को रोकना था। जिससे तत्काल और आरक्षित टिकटों पर कालाबाजारी खत्म हो सके। लेकिन सालभर यात्री तत्काल और प्रीमियम तत्काल के झाम में ही उलझे रहे।
सरकार ने कई बार तत्काल की दर बढ़ाई। सबसे पहले तो तत्काल के आरक्षण में ही बदलाव किया गया। तत्काल के तहत पहले घंटे में दस बजे से सिर्फ एसी के टिकट ही मिलने की व्यवस्था हुई, जबकि स्लीपर वालों की बारी 11 बजे के बाद आएगी। इसके बाद तत्काल किराए के दामों में बढोत्तरी की गई।
अब तत्काल टिकट लेने पर आपको पहले की अपेक्षा 25 प्रतिशत ज्यादा पैसा चुकाना होगा। यह नियम 25 दिसम्बर से लागू कर दिया गया। स्लीपर क्लॉस पर अब न्यूनतम तत्काल चार्ज 90 से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। जबकि अधिकतम चार्ज 175 से बढ़ाकर 200 रुपये हुआ है। जबकि एसी चेयरकार पर न्यूनतम तत्काल चार्ज 100 से बढ़ाकर 125 रुपये और अधिकतम चार्ज 200 से बढ़ाकर 225 रुपये कर दिया गया है।
एसी थ्री टियर पर न्यूनतम तत्काल चॉर्ज 250 से बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया है। जबकि अधिकतम चार्ज 350 से बढ़ाकर 400 रुपये कर दिया गया है। एसी टू टियर और एक्जीक्यूटिव क्लास में न्यूनतम तत्काल चार्ज 300 से ढ़ाकर 400 रुपये कर दिया गया है। जबकि अधिकतम चार्ज 400 से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है।
टिकट रद्द कराने पर करनी पड़ेगी ज्यादा जेब ढीली
प्रभु की रेल ने टिकट रद्द कराने के शुल्क को भी दोगुना करते हुए शुल्क वापसी के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव भी पेश कर दिया। हालांकि इसका मकसद तो ये बताया जा रहा है कि जरूरतमंद यात्रियों को कंफर्म टिकट मिल सके। नए नियमों के अनुसार ट्रेन निकलने के बाद शुल्क वापस नहीं किया जाएगा।
ट्रेन के प्रस्थान से चार घंटे पहले शुल्क वापसी की रकम प्राप्त करना जरूरी होगा। इसके अलावा द्वितीय श्रेणी का कंफर्म टिकट अगर ट्रेन के प्रस्थान करने के निर्धारित समय से 48 घंटे पहले रद्द किया जाता है तो उसके लिए अब 30 की बजाय 60 रुपए काटे जाएंगे जबकि तृतीय एसी के टिकट पर अब 90 रुपए की जगह 180 रुपए काटे जाएंगे।
द्वितीय स्लीपर क्लास के टिकट को रद कराने पर पहले 60 रुपए कटते थे जिसकी जगह अब 120 रुपए कटेंगे। द्वितीय एसी के टिकट रद कराने पर पहले 100 रुपए कटते थे अब एक झटके में ही 200 रुपए साफ हो जाएंगे। अब ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान से पहले 48 घंटे और 12 घंटे के बीच निरस्त कराने का शुल्क टिकट का 25 फीसदी होगा। पहले ट्रेन के प्रस्थान से पहले 48 घंटे और 6 घंटे के बीच निरस्त कराने का शुल्क टिकट का 25 फीसदी था।
सुविधा ट्रेन का किराया और प्रीमियम तत्काल जहाज के बराबर
बीते साल रेलवे ने सुविधा ट्रेन के नाम पर कुछ समय के लिए नई ट्रेनें शुरू की। खासकर त्यौहारों के मौसम पर होने वाली मारामारी को देखते हुए। लेकिन इसका किराया इतना रखा गया कि आम आदमी इससे सुनते ही चकरा जाए। मसलन कुछ ट्रेनों का किराया तो हवाई जहाज से भी ज्यादा रहा। आलम ये रहा कि त्यौहारी सीजन में इनके दाम तीन से चार गुना ज्यादा तक बिके।
जैसे दिल्ली से कोलकाता की टिकट हवाई जहाज से सात या साढ़े सात हजार रुपये में मिलती है लेकिन रेलवे ने वो टिकट छह हजार रुपये में दिया। कुछ ऐसी ही स्थिति प्रीमियम तत्काल की भी रही।
प्रीमियम तत्काल की दर तो दो से तीन गुणा तक रही। जैसे दिल्ली से बंगलुरू प्रीमियम तत्काल का टिकट सेकेंड ऐसी में 7000 रुपये में पड़ा जबकि आमतौर पर यह दो हजार रुपये तक पड़ता है।
बच्चों के लिए टिकट भी किया महंगा
रेलवे के नियमों के अनुसार पहले पांच साल से 12 साल के बच्चों का आधा किराया या न्यूनतम 300 किमी के बराबर का किराया लगता था। शून्य से पांच साल तक के बच्चों के लिए कोई टिकट नहीं था। नए नियमों के अनुसार आरक्षण के समय अगर आपको पांच साल से 12 साल के बच्चों की कंफर्म टिकट मिलती है तो आपको पूरा किराया देना होगा।
हालांकि अनारक्षित टिकटों में पहले की तरह नियम रहेंगे। साथ ही शून्य से पांच साल तक के बच्चों के किराए में बदलाव नहीं किए गए हैं। इसके लिए रेलवे ने रिजर्वेशन फॉर्म में भी बदलाव करने का निर्णय लिया है जिससे यह विकल्प भी होगा कि उन्हें बच्चों की कंफर्म बर्थ चाहिए या नहीं।
न्यूनतम टिकट का किराया बढ़ाया गया
नवंबर में रेलवे ने अपने न्यूनतम किराए में भी वृद्िध कर दी। जिसे 5 रुपये से बढ़ा कर 10 रुपये कर दिया गया है। रेलवे का कहना है कि इससे 10 रुपये के प्लेटफार्म टिकट के बदले 5 रुपये का टिकट ले कर प्लेटफार्म पर आने की प्रवृति खत्म होगी। इसके अलावा त्योहारों के समय प्लेटफार्म की बिक्री खत्म होने के दौरान इस तरह की टिकटों का इस्तेमाल करने की संभावना भी कम होगी।
यदि यात्री की ओर से कंफर्म बर्थ की डिमांड नहीं होती है तो आरएसी व वेटिंग टिकटों पर पचास प्रतिशत ही चार्ज किया जाएगा।