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'मां गले लगकर रोईं और कहा, सत्ता जहर के समान'

Sun, 20 Jan 2013 10:12 PM IST
जयपुर/ब्यूरो
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कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनने के बाद भावनाओं और संवेदनाओं से भरे राहुल गांधी के पहले भाषण ने जयपुर चिंतन शिविर में मौजूद कार्यकर्ताओं सहित राजनीतिक दिग्गजों की आंखें भी नम कर दी। बीते दौर की यादें राहुल की जबान पर आईं तो कई आंखों में आंसुओं का सैलाब सा उमड़ता दिखा।
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अपनी नई जिम्मेदारियों के अहसास को बयां करते हुए राहुल ने शनिवार रात को घटा राजनीतिक सच्चाई का एक वाकया भी साझा किया। उन्होंने कहा कि शनिवार रात मेरी मां सोनिया गांधी मेरे कमरे में आईं और मेरे गले लगकर खूब रोईं।

वह इसलिए रोईं क्योंकि वह अच्छी तरह समझती हैं कि सत्ता एक जहर के समान है, जो आपकी और आपके साथ वालों की जिंदगी को पूरी तरह बदल देता है। भावनाओं में पिरोए शब्दों की अविरल धारा बहाते हुए राहुल ने नई जिम्मेदारी मिलने के बाद कटी अपनी पहली रात का भी जिक्र किया।
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उन्होंने कहा कि आज सुबह मैं चार बजे उठा। बालकनी में गया। वहां काफी अंधेरा था और ठंड भी। उस समय नई जिम्मेदारी के अहसास के साथ कई बातें मेरे जेहन में आईं। उनमें से कुछ मैं आपसे साझा करूंगा।

बीतें दिनों की याद ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि बचपन में मुझे बैडमिंटन पसंद था। यह खेल मुझे इस जटिल दुनिया में संतुलन देता था। अपनी दादी के दो सुरक्षाकर्मियों के साथ मैं इसे खेलता। वे मेरे दोस्त हो गए थे। एक दिन उन्होंने मेरी दादी को मार दिया और मेरे जीवन का संतुलन छीन लिया।

मेरे पिता उस समय बंगाल में थे। वह सीधे दिल्ली लौटे। अस्पताल गए तो वहां गहरा अंधेरा था। तब मैंने पहली बार उन्हें रोते देखा। उसी दिन उन्होंने टीवी पर देश को संबोधित किया। वे अंदर से टूटे हुए थे मगर उनके संबोधन में मुझे अंधेरे आकाश में उम्मीद की एक किरण दिखी और मुझे यह अहसास अब भी याद है।

राहुल के भाषण के दौरान भावनाओं के गुबार को नहीं रोक पाने वालों में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर कांग्रेस के महासचिव जनार्दन द्विवेदी जैसे नेता भी शामिल थे।
प्रधानमंत्री की मौजूदगी में मंच पर बैठे कुछ दिग्गज भी इसे अलग नहीं थे। शीला दीक्षित को तो आंसू पोंछने के लिए खुद राहुल ने अपना रुमाल दिया। भाषण खत्म करने के बाद राहुल ने भी मंच पर ही अपनी मां को गले लगाया।

भावुक लहजा
- कल रात सब मुझे बधाई दे रहे थे। तब मां मेरे पास आकर रोईं। मां समझती हैं कि ‘पावर’ असल में जहर की तरह है। उन्होंने देखा है कि लोग कैसे इसका दुरुपयोग करते हैं।
- वे सुरक्षा गार्ड मेरे साथ बैडमिंटन खेलते थे जिन्होंने एक दिन दादी (इंदिरा गांधी) की जिंदगी ले ली और मेरे जीवन में गहरा असंतुलन पैदा कर दिया। तब जैसा दर्द मैंने महसूस किया, वैसा कभी नहीं किया।
- आप लोगों ने बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी है। कांग्रेस दुनिया का सबसे बड़ा परिवार है। अब कांग्रेस पार्टी ही मेरी जिंदगी है।

राजनीतिक अंदाज
- हमें सत्ता के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि सत्ता से मिलने वाली ताकत का इस्तेमाल दूसरों को सशक्त बनाने के लिए करना चाहिए।
- कांग्रेस में कानून नहीं हैं। यह मेरे लिए हैरानी की बात है। इसे बदलना होगा। बागियों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत है।
- टिकट बंटवारे का ढंग हमें बदलना होगा। लोग दूसरी पार्टियों से कांग्रेस में आते हैं। चुनाव लड़ते हैं और हारने पर चले जाते हैं।
- मैं अब पार्टी में किसी के वकील का काम नहीं करूंगा। अब मैं जज की भूमिका में रहूंगा।

देश को संदेश
- कांग्रेस किसी धर्म अथवा जाति की पार्टी नहीं पूरे हिंदुस्तान की पार्टी है। यह गांधीजी की पार्टी है। कांग्रेस में हिंदुस्तान का डीएनए है ।
- आज से मैं देश में सबके लिए काम करूंगा। भारत के लोगों को लिए लड़ूंगा।
- पिताजी (राजीव गांधी) कहते थे कि आम आदमी तक सौ में से 15 पैसे पहुंचते हैं। लेकिन मैं वादा करता हूं कि 99 पैसा जनता के पास पहुंचेगा।


‘दुनिया की लोकतांत्रिक व्यवस्था को ऐसे हाथों में देने का जोखिम नहीं उठाया जा सकता, जिसकी निर्णय लेने की क्षमता, राजनीतिक समझ और सोच के बारे में कुछ पता ही नहीं हो। नेतृत्व का चुनाव राजनीतिक विरासत के आधार पर नहीं बल्कि नेतृत्व क्षमता के आधार पर होना चाहिए।’-अरुण जेटली, राज्यसभा में विपक्ष के नेता
‘कांग्रेस को बेधड़क, पूरे गर्व से बीच के रास्ते पर चलना चाहिए क्योंकि देश का विशाल बहुमत ऐसा ही चाहता है और हम उनका प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर हम कांग्रेस की इस विचारधारा से भटककर दाएं या बाएं जाएंगे, तो निश्चित रूप से ठोकर खाएंगे। आज हम पूरे भारत की आवाज हैं।’-पी चिदंबरम, वित्त मंत्री
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