अगले लोकसभा चुनाव को ख्याल में रखकर चुनावी तैयारियों में जुटी कांग्रेस अपना हर कदम पूरी सावधानी के साथ रखना चाह रही है। भ्रष्टाचार और बदनामी को धोने के मकसद से जहां पार्टी के अंदर विचार विमर्श का दौर शुरू हो गया है, वहीं राहुल गांधी को संगठन में नंबर दो की पायदान पर स्थापित करने की टाइमिंग को लेकर भी मंथन हो रहा है।
इस मामले में काफी सतर्कता बरती जा रही है। राहुल की ताजपोशी को लेकर पार्टी के एक धड़े का मानना है कि संगठन में राहुल को बड़ी जिम्मेदारी देने के साथ होने वाले फेरबदल को गुजरात चुनाव के बाद अंजाम देना ही ठीक होगा। गुजरात चुनाव में कांग्रेस की डांवाडोल हालत को देखते हुए राहुल की ताजपोशी को अभी सिरे नहीं चढ़ाने की बात पार्टी के शीर्ष स्तर पर सोची जा रही है।
वहीं, संगठन और सरकार में संवाद की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए बुलाई गई बैठक के बाद अब राजनीतिक संकट से पार पाने के लिए अगले साल जनवरी में चिंतन शिविर बुलाने पर भी बात चल रही है। अगले लोकसभा चुनाव में राहुल के नेतृत्व में आगे बढ़ने का मन बना चुकी कांग्रेस अब उनको ध्यान में रखकर ही अपनी हर रणनीति बुन रही है। लिहाजा, राहुल को संगठन में सक्रिय भूमिका देने की टाइमिंग को लेकर शीर्ष स्तर पर बातचीत चल रही है।
हिमाचल प्रदेश में भले ही कांग्रेस और भाजपा में टक्कर का मुकाबला हो मगर गुजरात में नरेंद्र मोदी के सामने पार्टी को फिलहाल ज्यादा उम्मीद नहीं लग रही है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि वहां कोई चमत्कार ही नैया पार लगवा सकता है।
इसी सोच के मद्देनजर संगठन में फेरबदल और राहुल को नंबर दो की भूमिका देने की प्रक्रिया को अभी अंजाम नहीं देने की बात चल रही है। पार्टी हलकों में माना जा रहा है कि अगर राहुल को अभी बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है और गुजरात चुनाव में पार्टी मोदी के सामने पिछड़ती है तो यह राहुल की ताजपोशी के जश्न में खलल पड़ने जैसा होगा।
गुजरात में मतदान 13 और 17 दिसंबर को है, जबकि मतगणना 20 दिसंबर को है। हिमाचल चुनाव के मतों की गणना भी इसी दिन है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दिसंबर में राहुल की बड़ी जिम्मेदारी का ऐलान हो सकता है। जबकि जनवरी में चिंतन बैठक का आयोजन भी हो सकता है।