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PM नहीं, यूपी का CM बनना चाहते हैं राहुल

Thu, 10 Oct 2013 01:28 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के भाषणों में हर दिन गुजरने के साथ-साथ तल्खी आ रही है। और कांग्रेसी यह देख-सुनकर गदगद हैं।
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भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के सामने कांग्रेस पार्टी की सारी उम्मीदें अपने युवराज राहुल से लगी हैं। साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता इशारा कर चुके हैं कि राहुल को ही अगला पीएम बनना चाहिए।

लेकिन अगर यह कहा जाए कि एक वक्त था जब वह पीएम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का सीएम बनना चाहते थे, तो आप क्या कहेंगे?

सीएम पद का दावेदार बनने पर हुआ था विचार
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई की किताब '24 अकरब रोड' के नए संस्करण में जोड़े गए अध्याय में यह खुलासा है कि कांग्रेस जिसे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहती है, वही राहुल गांधी एक बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनना चाहते थे।
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इस किताब में यह है कि सोनिया गांधी 2016 में सक्रिय राजनीति से रिटायर होना चाहती हैं और राहुल के पार्टी की कमान संभालने के लिए हामी भरने की यह एक बड़ी वजह थी।

किदवई के मुताबिक कांग्रेसियों ने राहुल की यह पेशकश सिरे से खारिज कर दी थी। दरअसल, पार्टी के कुछ नेताओं का मानना था कि दिल्ली में उनकी सियासी ताकत का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव उनके लिए बड़ा झटका साबित हुए।

कांग्रेस कमेटी ने सिरे से खारिज किया प्रस्ताव
राहुल इन चुनावों से पहले और दौरान कई बार कह चुके थे उत्तर प्रदेश उनकी कर्मभूमि है और वह उसकी नुमाइंदगी करने के लिए तैयार हैं।

नए अध्याय में बताया गया है कि उन्होंने नवंबर, 2011 में फूलपुर रैली के दौरान कहा था, "जब मैं उत्तर प्रदेश में इस तरह का अन्याय देखता हूं, तो सोचता हूं कि क्यों न लखनऊ आकर रहूं और आपकी लड़ाई लड़ूं।"

इसमें कहा गया है, "राहुल के करीबी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनने के बारे में संजीदगी से विचार किया था। लेकिन कांग्रेस कमेटी ने इस विचार को सिरे से दरकिनार कर दिया।"

उस वक्त राहुल को उत्तर प्रदेश में क्यों कोई पद नहीं लेना चाहिए, सहयोगियों ने इसके दो कारण बताए थे। पहला, शासन करने के लिहाज से उत्तर प्रदेश काफी मुश्किल राज्य है। दूसरा, राहुल खुद को किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रख सकते।

यूपी को अपनी पहचान बनाना चाहते थे राहुल?
दलील यह थी कि राहुल अगर उत्तर प्रदेश को अपनी पहचान बनाते हैं और किसी वजह से मतदाता उन्हें खारिज करते हैं, तो इससे दिल्ली में उनकी अगुवाई में सरकार बनाने का कांग्रेस का ख्वाब जाता रहेगा।

और ऐसा हुआ भी। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस केवल 28 सीटों पर सिमटकर चौथे पायदान पर आ गई। अगर राहुल को सीएम पद का दावेदार बनाया जाता है, तो यह उनकी छवि के लिए तगड़ा झटका होता।

कांग्रेस की नाकामी की वजह
किताब में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नाकाम होने की वजह भी गिनाई हैं।

उनके मुताबिक शुरुआती आक्रामकता दिखाने के बावजूद राहुल और कांग्रेस, दोनों ही रणनीतिक मोर्चे पर मुलायम सिंह यादव, मायावती और भाजपा जैसे मंजे-मंजाए खिलाड़ियों से टक्कर लेने की स्थिति में नहीं थी।

किदवई ने इस अध्याय में लिखा है कि कांग्रेस के फेल होने की वजह उसके अपने नेता भी बने। आसमान छूती उम्मीदों के अलावा सलमान खुर्शीद, बेनी प्रसाद वर्मा, श्रीप्रकाश जायसवाल और दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं के कुछ विवादित बयान भी कांग्रेस के खिलाफ गए।
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