कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए सांप्रदायिकता को अपना मुख्य औजार बनाएगी। इसका साफ संकेत शनिवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने फिक्की के एक कार्यक्रम दिया।
राहुल ने उद्योगपतियों के बीच परोक्ष रूप से मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश नफरत और समाज को बांटने की कट्टरता को कभी स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने यूरोप खासकर जर्मनी से शुरू हुए विश्व युद्ध की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय नफरत और अकड़पन के रवैये से पूरी दुनिया झुलस गई थी।
राहुल अप्रत्यक्ष रूप से जर्मनी के शासक हिटलर के तानाशाही रवैये का जिक्र कर रहे थे, जिसकी वजह से विश्व युद्ध छिड़ा था। उनके इस उदाहरण को मोदी पर हमला माना जा रहा है।
उद्योगपतियों से घिरे राहुल ने कांग्रेस की खराब हालत, देश में महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी ने चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया।
साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजनीति में हमेशा एक जैसा समय नहीं रहता। कभी अच्छा तो कभी बुरा वक्त आता रहता है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि चुनावों में हार से कई सबक सीखे हैं। जनता का एक संदेश मिला है।
हम मजबूती से आगे बढ़ेंगे। फैसले लेने में चुस्ती और तेजी लानी होगी। उन्होंने कहा कि अकेला लोकपाल ही भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए काफी नहीं है। इसके लिए और बहुत से कानून बनाने पड़ेंगे। जिन पर सरकार काम कर रही है।
राहुल ने कहा कि समाचार पत्रों में इन दिनों सरकार के बारे में अच्छी खबरें कम ही रहती है। इस समय देश में भ्रम का माहौल बनाया जा रहा है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए खराब है। भ्रष्टाचार आज देश में सबसे बड़ा मुद्दा है।
फैसले पारदर्शी तरीके से लेने होंगे ताकि जनता को हर बात की जानकारी हो। राहुल ने कहा कि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए यूपीए सरकार ने किसी भी अन्य सरकार की अपेक्षा कहीं अधिक काम किए है।
महंगाई सबसे बड़ी चिंता
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का कहना था कि महंगाई कम करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए हमें तकनीकी के बेहतर इस्तेमाल के साथ-साथ जमाखोरी पर नकेल कसना होगा। जिससे मांग और आपूर्ति में संतुलन बनाया जा सके। कृषि क्षेत्र दूसरी हरित क्रांति की दहलीज पर है। जिसके लिए प्राथमिकता के आधार पर काम किया जा रहा है।
जल्द प्रोजेक्ट क्लीयरेंस के लिए होंगे प्रयास
राहुल के अनुसार प्रोजेक्ट क्लीयरेंस में हो रही देरी, उससे खड़ी होने वाली समस्याएं औद्योगिक विकास में बाधा खड़ी कर रही हैं। उनके अनुसार यूपीए सरकार एक नेचुरल रिसोर्स इंवेस्टमेंट एसपीवी (विशेष) बनाने पर विचार कर रही है, जो कि प्रोजेक्ट के लिए सभी तरह के क्लीयरेंस प्राप्त करेगी।
क्लीयरेंस मिलने के बाद निजी क्षेत्र की कंपनियां नीलामी में शामिल होंगी। यदि ऐसा होता है, तो निजी क्षेत्र के लिए किसी प्रोजेक्ट में भाग लेना जहां आसान होगा, वही निवेश में भी तेजी आएगी।
केवल क्लीयरेंस की अड़चनों की वजह से बिजली, सड़क सहित दूसरी कई बुनियादी क्षेत्रों की परियोजनाएं अटकी पड़ी है।
10 साल में 10 करोड़ नए रोजगार
राहुल के अनुसार अगले दस साल में हम 10 करोड़ नए रोजगार का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। जिसके लिए मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र पर हमें जोर देना है।
इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की जीडीपी में 25 फीसदी तक हिस्सेदारी करनी होगी। यह लक्ष्य पाया जा सकता है। इसके लिए श्रम सुधार के साथ पॉवर सेक्टर जैसे क्षेत्रों में सुधार करना होगा।
मल्टी ब्रांड रिटेल में आ सकते हैं नए प्रस्ताव
ब्रिटेन की दिग्गज कंपनी टेस्को द्वारा भारत में मल्टी ब्रांड क्षेत्र में कारोबार के लिए प्रस्ताव देने से उत्साहित सरकार आने वाले दिनों में कई और ऐसे प्रस्ताव आने की उम्मीद कर रही है।
फिक्की के ही कार्यक्रम में शनिवार को वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा है कि इस वित्त वर्ष के अंत तक मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई के कुछ और प्रस्ताव आ सकते हैं।