कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ‘आईएसआई’ वाले बयान को लेकर उठा बवंडर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुस्लिम संगठनों और भाजपा के सख्त ऐतराज के बाद शनिवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने भी दबी जुबान से ही सही लेकिन इसे गलत माना। उन्होंने तो यहां तक कहा कि राहुल को अपने इस बयान पर माफी मांगनी चाहिए।
रमेश ने उर्दू मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि राहुल के बयान पर आप लोगों की नाराजगी को हम समझ सकते हैं लेकिन राहुल का इरादा आपकी भावना को आहत करने का नहीं था। जयराम यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ मुस्लिम नेता ही नहीं बल्कि पार्टी के अंदर भी लोग सहमत नहीं है।
हालांकि उन्होंने कहा कि इस बयान से राहुल की मंशा पर किसी तरह का शक नहीं किया जा सकता। उनका इरादा मुस्लिमों की भावनाओं को आहत करने का नहीं था। लेकिन यदि आप लोग यह समझते हैं कि राहुल को अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने की जरूरत है, और अच्छा होगा कि वे अपने इस बयान पर माफी मांग लें।
जब जयराम रमेश यह बात कह रहे थे, उस वक्त वहां पर संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला भी मौजूद थे। रमेश को शायद यह अहसास था कि वे क्या बोल रहे हैं। इसलिए उन्होंने आशंका जाहिर करते हुए यह भी कहा कि हो सकता है मेरे इस बयान के बाद भी बवाल हो जाए आश्चर्य नहीं है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के इंदौर में एक चुनावी रैली में कहा था कि मुजफ्फरनगर में जो कुछ हुआ वह बेहद ही शर्मनाक है। वहां पर जो आग लगी है, उसका खतरनाक असर हो रहा है। मेरे पास एक पुलिस वाला आया। मैने उससे पूछा कि क्या हो रहा है। इस पर उसने बताया कि मुजफ्फरनगर में दंगा पीड़ित ऐसे 10-15 मुसलमान लड़के हैं, जिनके भाई, बहनों को मारा गया है। उनसे पाकिस्तान के लोग बात कर रहे हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई उन्हें भड़का रही है। दूसरी तरफ मैं उन लड़कों से बात कर रहा हूं। उन्हें समझा रहा हूं कि भैया उनकी बातों में मत आना।
राहुल के इस बयान के बाद भाजपा ने कड़ा विरोध करते हुए उन पर चुनावी फायदा लेने का आरोप लगाया था। मुस्लिम संगठनों ने भी राहुल के बयान की कड़ी निंदा की थी। मुस्लिम नेताओं ने कहा कि राहुल मुसलमानों की देशभक्ति पर शक कर रहे हैं। बात यही पर खत्म नहीं हुई। भाजपा ने राहुल के इस बयान की शिकायत चुनाव आयोग से भी की थी।
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। राहुल ने चुनाव आयोग से कहा कि उन्होंने किसी भी आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया है लेकिन चुनाव आयोग उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और हिदायत दी कि जुबान संभालकर बोलें।