कांग्रेस आला कमान 2014 आम चुनावों के लिए राहुल गांधी को पीएम पद का दावेदार घोषित करने की तैयारी में था। उम्मीद की जा रही थी कि 17 जनवरी को होने वाले कांग्रेस अधिवेशन में उन्हें लेकर कोई बड़ा ऐलान किया जा सकता है।
लेकिन इस बारे में राहुल गांधी क्या सोचते हैं, यह अब तक पता नहीं चल रहा था। लेकिन कांग्रेस आला कमान राहत की सांस ले सकता है। अब तक कोई फैसला न करने वाले राहुल गांधी ने अपनी राय सभी के सामने रख दी है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल ने कहा है कि वह किसी भी तरह की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं और जो भी पार्टी चाहेगी, वह करने को तैयार हैं। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में राहुल गांधी ने यह बात कही।
'हर जिम्मेदारी के लिए तैयार हूं'
राहुल गांधी ने यह उम्मीद भी जताई कि कांग्रेस आगामी आम चुनावों में बढ़िया प्रदर्शन कर दिखाएगी और उनकी पार्टी आम चुनावों में लौटकर देश के लिए अच्छे काम करेगी।
राहुल ने कहा, "कांग्रेस को हमेशा कम करके आंका जाता है और मुझे भरोसा है कि हम आगामी चुनावों में भी अच्छा प्रदर्शन कर दिखाएंगे। अगर कांग्रेस सत्ता में लौटती है, तो यह देश के लिए अच्छा होगा।"
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने उन खबरों को खारिज कर दिया कि कांग्रेस तेजी से अपने सहयोगी गंवा रही है। उन्होंने कहा, "यह कहना गलत है कि मेरी पार्टी सहयोगी खो रही है, हम महाराष्ट्र और जम्मू कश्मीर में गठबंधन रखते हैं।"
'प्रियंका नहीं संभालेंगी चुनावी जिम्मेदारी'
कांग्रेस के दिग्गज नेता ने इन कयासों को भी दरकिनार कर दिया कि उनकी बहन प्रियंका वॉड्रा लोकसभा चुनावों में कोई बड़ी भूमिका अदा करेंगी।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता है कि प्रियंका चुनाव से जुड़ी कोई भूमिका संभालेंगी।" ऐसे कयास लगाए जा रहे थे प्रियंका कांग्रेस की तैयारियों को लेकर कोई अहम किरदार अदा कर सकती हैं।
ऐसी खबरें इसलिए आईं, क्योंकि प्रियंका ने हाल में कांग्रेसी नेताओं की एक बैठक में शिरकत की थी, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल, दोनों ही मौजूद नहीं थे। हालांकि, कांग्रेस ने इसका बचाव करते हुए कहा कि प्रियंका हमेशा की तरह रायबरेली और अमेठी में चुनाव प्रचार का जिम्मा संभालेंगी।
'सही नहीं हैं AAP की नीतियां'
राहुल गांधी आम आदमी पार्टी पर भी बोले। विधानसभा चुनाव की हार के बाद उन्होंने कहा था कि AAP आम लोगों से जुड़ने में कामयाब रही है और हम उनसे सीखने की कोशिश करेंगे। साथ ही कांग्रेस को पूरी तरह बदल दिया जाएगा। लेकिन आज वह हमला बोलने के मूड में थे।
राहुल ने कहा, "मैं आम आदमी पार्टी की ज्यादातर नीतियों से इत्तफाक नहीं रखता।" अरविंद केजरीवाल की पार्टी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, "हमें ऐसे फैसले करने चाहिए, जो केवल छोटी अवधि नहीं, बल्कि लंबी मियाद में भी फायदेमंद साबित हों।"
आम आदमी पार्टी की दिल्ली जीत ने अरविंद केजरीवाल की उम्मीदें बढ़ा दी हैं और वह अब लोकसभा चुनावों की कई सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि शहरी इलाकों में वह खेल बिगाड़ सकती है।
मोदी पर भी किया हमला
नरेंद्र मोदी विधानसभा चुनावों से पहले से राहुल गांधी पर हमले कर रहे हैं। उन्हें शहजादा कहते हुए कई बार निशाने पर लिया गया। लेकिन राहुल ने सीधे तौर पर कभी मोदी का जिक्र नही किया। लेकिन चुनाव करीब आ रहे हैं, इसलिए अब इंतजार बेकार है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने इस बार भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोलने का मौका नहीं चूका। उन्होंने कहा, "भारत को केवल एक व्यक्ति के विचारों के मुताबिक नहीं चलाया जा सकता।"
ऐसा मालूम देता है कि कांग्रेस ने समझ लिया है कि आक्रामक रुख अख्तियार करने का वक्त आ गया है। अब तक वह बैकफुट पर दिख रही थी, लेकिन अचानक पार्टी में सरगर्मियां बढ़ रही हैं।
कांग्रेस ने तेज की तैयारियां
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पद से जुड़ी जिम्मेदारी और दूसरे मुद्दों पर अपनी राय एआईसीसी की अहम बैठक से ठीक पहले सामने रखी है, जो 17 जनवरी को होनी है।
उम्मीद की जा रही है कि इसी दिन उन्हें पार्टी की तरफ से पीएम दावेदार बना दिया जाएगा। इस बैठक में कांग्रेस चुनावों को लेकर रणनीति तैयार करेगी।
राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली के विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त के बाद पार्टी महासचिव जर्नादन द्विवेदी ने ऐलान किया था कि 17 जनवरी को कांग्रेस की अहम बैठक होगी। उसी दिन साफ हो गया था कि राहुल को लेकर कोई बड़ी घोषणा हो सकती है।
मोदी, केजरीवाल की चुनौती का जवाब?
भाजपा ने नरेंद्र मोदी को सितंबर में अपना पीएम पद का दावेदार बनाया था और इसे लेकर कांग्रेस की आलोचना की जा रही थी कि उनकी तरफ से कोई नेता तय नहीं किया गया।
विधानसभा चुनावों के नतीजे वाले दिन पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि पार्टी सही वक्त पर प्रधानमंत्री पद के लिए अपने दावेदार का ऐलान कर देगी। इस मौके पर राहुल गांधी ठीक उनके बराबर में खड़े थे।
द्विवेदी ने उस वक्त इन सवालों को बेजा करार दिया था कि यह बैठक राहुल गांधी के लिए बुलाई जा रही है। उनका कहना था कि इस बैठक का एजेंडा कांग्रेस वर्किंग कमेटी तय कर सकती है।
अब ऐलान औपचारिकता भर
पिछले साल जनवरी में जयपुर में हुई एआईसीसी की बैठक के बाद अगली मीटिंग का इंतजार किया जा रहा था। इस बैठक में राहुल को पार्टी उपाध्यक्ष का पद दिया गया था।
यह बैठक ऐसे वक्त बुलाई गई, जब भाजपा की तरफ से नरेंद्र मोदी लगातार उभर रहे हैं और आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने दोनों बड़े राजनीतिक दलों के सिर में दर्द कर रखा है।
इसके अलावा कांग्रेस के सामने ज्यादा से ज्यादा सहयोगी बटोरने की चुनौती भी है। हाल में एम करुणानिधि की डीएमके ने साफ कर दिया कि वह कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी। अब देखना है कि राहुल क्या कमाल कर दिखाते हैं!
'राहुल को जो मिला, परिवार की वजह से'
राहुल गांधी के पीएम पद की दावेदारी के लिए हां भरते ही भाजपा ने अपने हमले तेज कर दिए हैं। भाजपा का कहना है कि राहुल को जो कुछ भी मिला है, वह काबिलियत नहीं बल्कि एक परिवार विशेष में पैदा होने की वजह से मिला।
भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, "राहुल को जो मिला है, वह परिवार की वजह से। सिर्फ भाजपा ऐसी पार्टी है, जहां साधारण चाय वाले के परिवार से आने वाले शख्स को पीएम पद का दावेदार बनाया जाता है और जनता उन्हें आशीर्वाद भी देगी।"
राहुल ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में खूब विकास हुआ, इस पर उन्होंने कहा, "मुझे इन दावों पर हंसी आती है। अगर वह ऐसा वाकई कह रहे हैं, तो यह जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।"