कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में चुनावी बिगुल फूंकते हुए एक बार फिर जज्बाती अंदाज में मां (सोनिया गांधी) के बलिदान का किस्सा सुनाया।
राहुल ने संसद में खाद्य सुरक्षा बिल पास होने वाली रात सोनिया की बीमारी की पूरी कहानी सुनाई। उन्होंने फूड बिल को सोनिया का सपना बताते हुए मध्य प्रदेश की जनता से भावुक अपील की।
उन्होंने कहा कि यह बिल पास होते हुए उनकी आंखों में आंसू थे क्योंकि वह इसके लिए वोट नहीं कर पाई थीं। उन्होंने कहा कि इस बिल के पास होने से अब देश में कोई भूखा नहीं रहेगा।
राहुल ने अपने भाषण में एमपी की शिवराज सिंह चौहान सरकार पर तो तीखे वार किए ही भाजपा की नीतियों को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने खाद्य सुरक्षा बिल रोकने की भरपूर कोशिश की।
शहडोल से करीब 18 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल लालपुर में कांग्रेस की ‘सत्ता परिवर्तन रैली’ को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, ये लोग विकास की बात करते हैं।
मेरी नजर में आदिवासियों की इज्जत सबसे बड़ी बात है और यह राजनीति की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों से उनका पारिवारिक रिश्ता है, राजनीतिक नहीं।
कांग्रेस की सरकार आएगी, तो आपकी इज्जत करेगी। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए राहुल बोले कि मध्यप्रदेश में भूखे लोगों की संख्या अफ्रीका के बराबर है।
उन्होंने कहा, जब कोई भूखा रहता है, तो विकास की बात तो शुरू ही नहीं होती है। भाजपा सरकार के विकास का पैमाना सड़कें हैं, एक तरफ सड़क बना दो और दूसरी ओर आदिवासी को खड़ा कर वहां से चमकती हुई गाड़ियां निकालो।
क्या यही इनका विकास है। राहुल ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह आम आदमी, आदिवासियों, गरीबों और दलित को संसद, विधानसभाओं और पंचायतों में नहीं देखना चाहती। इससे देश का नुकसान होता है।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राजग की पूर्व सरकार के कार्यकाल में देश में 2650 किलोमीटर सड़कें बनाई गईं जबकि यूपीए सरकार के पांच साल में 9570 किलोमीटर सड़कें बनीं।
सभा को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ, केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री एवं मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की चुनाव प्रचार समिति अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद कांतिलाल भूरिया ने भी संबोधित किया।
राहुल ने सुनाई ‘मां’ की कहानी
राहुल ने संसद का किस्सा सुनाते हुए कहा, खाद्य सुरक्षा बिल पास होने के दौरान संसद में मेरी मां सोनिया की तबियत बिगड़ गई थी। मां, शैलजा कुमारी के साथ बाहर निकल गईं। मैं संसद में उन्हें देखने गया।
वहां मां और शैलजा बैठी थीं। मैंने पूछा इतनी जरूरी क्या बात हो रही है। तब मुझे पता चला कि मां की तबियत खराब है। मैंने कहा अगर तबियत खराब है तो अस्पताल चलते हैं। मैं उन्हें कमलनाथ जी के कमरे में ले गया।
वहां मां ने कहा कि मैं यहां से नहीं जाऊंगी। मां ने अस्पताल जाने से मना कर दिया। मैंने पूछा क्यों नहीं जाएंगी। उन्होंने कहा कि बिल पास होने से पहले मैं यहां से नहीं जाऊंगी।
मैं सालों से इसके लिए लड़ी हूं और बिना बटन दबाए नहीं जाऊंगी। तब मां दोबारा लोकसभा के अंदर गईं। मैं भी गया और अब हर दो मिनट में उन्हें देखने लगा। वो फिर से पीछे चली गईं।
मैं उनके पास गया और अड़ गया कि अब अस्पताल जाना है। मैं घसीटकर मां को ले गया और प्रियंका को फोन किया। हम दोनों अस्पताल गए, मां से सांस नहीं ली जा रही थी, उनकी आंख में आंसू था।
मैंने उनसे पूछा ये क्या है, उन्होंने कहा मैं उस बिल के लिए लड़ी थी, लेकिन बटन नहीं दबा पाई।