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पड़ोसियों को भी लगा राहुल गांधी का वायरस!

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 44 दिनों से छुट्टी पर हैं। फरवरी में खबर आई थी कि राहुल गांधी चंद दिनों के लिए 'सबैटिकल लीव' यानी चिंतन-मनन के लिए छुट्टी पर जा रहे हैं। कहा गया कि वह होली के बाद वापस लौट सकते हैं। पूछा गया-राहुल विदेश में हैं या भारत में। सही जवाब कोई नहीं दे पाया। किसी ने कहा कि थाइलैंड में, किसी ने कहा ग्रीस में, किसी ने वियतनाम में।
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कांग्रेस के ही एक नेता जगदीश शर्मा ने पहाड़ों में कैपिंग कर रहे राहुल गांधी की तस्वीरें ट्विटर पर शेयर कीं और बताया कि वे उत्तराखंड में हैं। पड़ताल हुई तो पता चला की तस्वीरें पुरानी हैं।

होली बीत गई, राहुल नहीं आए। बल्कि खबर आई कि उन्होंने अपने छुट्टी बढ़ा ली है, मार्च के अंत में आएंगे। मीडिया ने कांग्रेस के हर बड़े नेता का दरवाजा खटखटा कर पूछा कि राहुल कहां है? जवाब मिला-हमें नहीं पता। राहुल के गायब होने के चंद दिनों बाद ही मार्च बीतने वाला ही था कि राहुल गांधी के राजनीतिक गुरु दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे हिंदुस्तान में ही हैं और 19 अप्रैल में होने वाली किसान रैली में 'प्रकट' होंगे यानी शामिल होंगे।
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राहुल के निशाने पर किम जोंग इल का रिकॉर्ड

राहुल के पहले उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग इल ही ऐसे नेता थे, जो 80 दिनों तक गायब रहे। जब तक वह दिखे नहीं, मीडिया में उनके बारे में तरह-तरह की अफवाहें फैलती रहीं। किम जोंग इल के रिकॉर्ड को देखते हुए ‌फिलहाल यही कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनावों में ताबड़तोड़ राहुल गांधी गायब होने के मामले में भी जीत नहीं सकते। 80 दिन की छुट्टी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उन्हें शायद ही दें।

राहुल गांधी की नामौजूदगी में गाहेबगाहे प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग उठती रही। लगता था कि ऐसी बीमारी शायद कांग्रेस को ही है कि भाई छुट्टी पर जाए और बहन को पार्टी की कमान सौंप दी जाए!

लेकिन गुरुवार को जैसी खबरें आईं, उससे लगा कि छुट्टी बीमारी केवल राहुल गांधी को ही नहीं, पड़ोसियों को भी लग चुकी है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो भी छुट्टी पर जा रहे हैं, वह भी दो साल की। बिलावल की जगह पीपीपी की कमान उनकी बहन बख्तावर भुट्टो को सौंपी जा सकती है।
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बिलावल भुट्टो को भी लगा 'राहुल रोग'

खबरें यह भी आई कि बिलावल का अपने पिता आस‌िफ अली जरदारी से पार्टी के कामकाज ढंग को लेकर झगड़ा चल रहा है। जरदारी इसलिए उन्हें हटाकर ब्रिटेन में पढ़ी उनकी बहन बख्तावर भुट्टो को पीपीपी का प्रमुख बनाना चाहते हैं।

राहुल गांधी का किस्सा भी कुछ ऐसा ही है। यहां राहुल कांग्रेस के कामकाज के ढंग से नाराज है और कांग्रेस आला नेता इस बात से कि राहुल हमारे ढंग से काम क्यों नहीं करते।

देखा जाए तो राहुल गांधी पर राजन‌ीतिक विरासत संभालने और अपनी पार्टी को आगे बढ़ाने का जैसा दबाव है, लगभग वैसा ही दबाव बिलावल पर भी है।

और दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं से परेशान हैं।
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