सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर जमीन विवाद की आंच कम भी नहीं हुई थी कि जमीनों की खरीद-फरोख्त के लपेटे में उनके पुत्र और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी भी आ गए हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला ने राहुल गांधी पर सस्ते में जमीन हथियाने का आरोप लगाया है। हालांकि कांग्रेस ने राहुल पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
खरीद-फरोख्त में ब्लैक मनी का इस्तेमालचौटाला ने आरोप लगाया है कि हरियाणा के पलवल जिले के हसनपुर में राहुल गांधी को जमीन की रजिस्ट्री में राज्य सरकार ने काफी कम राजस्व लिया, वहीं उन्होंने खरीद-फरोख्त में ब्लैक मनी का इस्तेमाल किया। चौटाला ने पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस से कराए जाने की मांग की है।
लाखों रुपए की स्टाम्प ड्यूटी की चोरीचौटाला ने कहा कि वाड्रा और राहुल दोनों ने जमीनों की खरीदारी में लाखों रुपए की स्टाम्प ड्यूटी की चोरी की है। अगर निष्पक्ष जांच कराई जाए तो हजारों एकड़ जमीन का घोटाला सामने आ सकता है। चौटाला ने जालंधर में पत्रकार वार्ता में राहुल के नाम पर खरीदी गई जमीन की रजिस्ट्री के कागजात दिखाए और कहा कि उनके नाम पर 51 कनाल 13 मरला जमीन गांव मौजा हुसनपुर, तहसील होडल जिला फरीदाबाद (अब पलवल) में खरीदी गई है। जमीन को एचएल पाहवा पुत्र शेर सिंह पाहवा निवासी डीएलएफ गुड़गांव ने बेचा।
गवाही देने वाले को विधानसभा का टिकटतीन मार्च 2008 को पाहवा ने राहुल गांधी को जिस समय जमीन बेची उस समय उसका कलेक्टर रेट 8 लाख रुपए प्रति एकड़ था, लेकिन स्टांप ड्यूटी डेढ़ लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से जमा की गई। जमीन की रजिस्ट्री में गवाही ललित नागर ने डाली थी, जिसको कांग्रेस ने विधानसभा का टिकट दिया।
कागजातों में काफी कम पैसे का लेनदेनइनेलो प्रमुख ने आरोप लगाया कि एक ही दिन वाड्रा और राहुल की जमीनों की रजिस्ट्रियां की गईं और दोनों में डेढ़ लाख रुपए प्रति एकड़ राजस्व लिया गया। उन्होंने बताया कि हसनपुर में 2008 में जमीन की कीमत 30 लाख रुपए प्रति एकड़ के आसपास थी, लेकिन कागजातों में काफी कम पैसे का लेनदेन हुआ, बाकी सारा काला धन इस्तेमाल हुआ है।
राहुल गांधी की रजिस्ट्री का लेखा जोखा (रजिस्ट्री नं.4780)
सेल डीड हुई: 26 लाख 47 हजार की
स्टांप ड्यूटी :. 1,58 820 रुपए
चौटाला के आरोप-रॉबर्ट वाड्रा को गुड़गांव, मानेसर, फरीदाबाद, मेवात, पलवल में कौड़ियों के भाव जमीन दी गई, जिसमें अरबों रुपएका घोटाला हुआ।
-वाड्रा की कंपनी मेसर्स रियल अर्थ इस्टेट नई दिल्ली ने साढ़े सात करोड़ की जमीन खरीदकर 58 करोड़ में डीएलएफ को बेच दिया, जिसमें 50 करोड़ एडवांस में लिए।
-रॉबर्ट की कंपनी ने मई 2009 में मेवात जिले के गांव शकरपुरी में छह अलग-अलग रजिस्ट्रियां करवाकर 29 एकड़ जमीन खरीदी, जिसका बाजार में भाव 14 करोड़ रुपये और कलेक्टर रेट साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक। जबकि यह रजिस्ट्रियां 71 लाख रुपए के हिसाब से करवाई गईं। उस समय शकरपुरी में कलेक्टर रेट 16 लाख प्रति एकड़ और बाजार का भाव 40-50 लाख रुपए प्रति एकड़ था। यह रजिस्ट्रियां ढाई लाख रुपए प्रति एकड़ से भी कम रेट पर करवाई गईं। यह रजिस्ट्रियां रॉबर्ट वाड्रा के नाम पर आफ ताब अहमद के परिवार द्वारा करवाई गईं, जो नूंह विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं।
-सरकार द्वारा पुनर्वास योजना के तहत अलाट की गई दलितों की जमीनों की रजिस्ट्रियां भी वाड्रा की कंपनी के नाम पर की गईं, यह गैर कानूनी है। अलाट जमीन बिक नहीं सकती है। इसमें शंकर लाल आदि की जमीन है, जिसका रजिस्ट्रेशन वार्डा की कंपनी को 15 अप्रैल 2009 में किया गया। मामचंद आदि की जमीन का रजिस्ट्रेशन वाड्रा की कंपनी को 28 अप्रैल 2009 व 12 दिसंबर 2008 को किया गया।
हरियाणा में 21 हजार एकड़ का सीएलयू हुआ..चौटाला ने कहा कि हरियाणा में 21 हजार एकड़ का चेंज ऑफ लैंड यूज हुआ है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने रिलायंस ग्रुप के साथ भी हरियाणा सरकार का अंदरखाते लेन देन का आरोप लगाया। चौटाला ने कहा कि हरियाणा में स्पेशल एकोनामिक जोन के लिए रिलांयस को 21 स्थानों पर जमीन दी गई थी। रिलांयस ने इन स्थानों पर कोई कामर्शियल कार्य शुरू नहीं किया, जबकि उसे कई प्रकार की रियायतें दी गईं थीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जमीनों को वापस किसानों को लौटाया जाए।