कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आईएसआई से संबंधित टिप्पणी को लेकर चुनाव आयोग से सात दिन की मोहलत मांगी है।
राहुल ने चुनाव आयोग से कहा कि वे पिछले कुछ दिनों से चुनाव कार्यक्रमों को लेकर बेहद व्यस्त रहे हैं। ऐसे में दी गई अवधि में उनके लिए जवाब देना मुश्किल है।
राहुल गांधी ने कहा था कि मुजफ्फरनगर दंगों के कुछ पीड़ित पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के संपर्क में हैं। इस बयान पर भाजपा सहित अन्य दलों ने राहुल की कड़ी आलोचना की थी।
भाजपा ने की थी शिकायत
इस टिप्पणी को लेकर भाजपा ने राहुल पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से उनकी शिकायत की थी।
चुनाव आयोग ने राहुल के 23 अक्तूबर को राजस्थान के चुरू और 24 अक्तूबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में दिए गए भाषण की समीक्षा करने के बाद उन्हें नोटिस जारी किया था।
आयोग ने राहुल को जवाब देने के लिए 4 नवंबर को 11:30 बजे तक का वक्त दिया था। आयोग ने उनसे पूछा था कि उन पर आचार संहिता उल्लंघन की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।
नोटिस में आयोग ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या लगता है कि राहुल के भाषणों से आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है।
निराधार आरोप लगाने से बचें
आयोग के मुताबिक आचार संहिता कहती है कि कोई भी पार्टी या प्रत्याशी समुदायों, जाति या धर्म के बीच घृणा फैलाने या तनाव पैदा करने के कृत्यों में लिप्त नहीं होगा।
संहिता में साफ कहा गया है कि दूसरे दलों पर निराधार आरोप लगाने से बचना चाहिए और वोट हासिल करने के लिए जाति या संप्रदाय के आधार पर कोई अपील नहीं की जानी चाहिए।