फ्रांस के साथ 36 राफेल फाइटरजेटों के सौदे को ग्रहण लगना करीब-करीब तय माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि इस सौदे के अंतर्गत मौजूदा सरकार को पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी की टिप्पणी को क्रॉस कर पाना काफी मुश्किल हो रूप देने की गेंद भावी सरकार पर डाल दी थी।
सूत्र का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार ने सौदे को अंतिम रूप में देने के क्रम सन 2007 की निविदा को आधार माना था। इसमें तकनीकी हस्तांतरण की शर्त थी और कामर्शियल ट्रायल के तहत फाइटर जेटों की कीमत का भी उल्लेख किया था। इसमें फ्रांस से तैयार हालत और बाद में साझा कार्यक्रम के तहत मिलने वाले फाइटर जेटों की गुणवत्ता को भी वायुसेना की जरूरत के हिसाब से तय करने पर जोर दिया गया था।
लाइफ साइकिल कास्ट भी अहम मुद्दा था। सबकुछ सुनिश्चित करने के बाद तत्कालीन सरकार ने अपनी टिप्पणी के साथ सौदे को आगामी सरकार के विवेक पर छोड़ दिया था। रक्षा मंत्रालय में कार्य कर चुके संयुक्त सचिव स्तर केअधिकारी के मुताबिक इस बर्डर लाइन को क्रॉस कर पाना काफी कठिन है।