एक जमाना था जब लोग सुबह उठकर आकाशवाणी की मधुर धुन के साथ दिन की शुरूआत करते थे। उसके बाद समाचार, भूले बिसरे गीत, चित्रमाला और कई कार्यक्रमों के साथ उद्घोषकों की आवाज तक को याद रखते थे।
शाम होते-होते युववाणी और फिर सैनिकों की पसंद की जयमाला सबकी पसंद बने हुए थे। रात को बिस्तर पर नींद लेने से पहले श्रोता हवामहल सुनना नहीं भूलते थे।
इस बीच शिलांग रेडियो स्टेशन पर बिनाका गीतमाला सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला कार्यक्रम बना, जिसे अमीन सयानी की आवाज ने और भी नफासत बख्शी।
मनोरंजन, ज्ञान, प्रचार से लेकर मन की बात तक का सफर
समाचार वाचकों में देवकीनंदन पांडे, रामानुज प्रसाद, इंदु बाली की यह
आकाशवाणी है... को आज भी पुराने लोग अपने जेहन में संभालकर रखे हुए हैं।
रेडियो पर ही फरमाइशों श्रोताओं के तौर पर झुमरीतिलैया की खास पहचान तक
बनी। फिर धीरे-धीरे शहर के अधिकांश घरों से ट्रांजिस्टर गुम होते चले गए।
अब एफएम का दौर आया। घरों से वाहनों तक फिर से मनपसंद गीतों के साथ
मनोरंजन, ज्ञान, प्रचार तक का क्रेज बढ़ा वहीं इस पर ट्रैफिक जाम तक और
काम की सूचनाएं भी मिलने लगीं।
इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का
मन की बात कार्यक्रम भी खासा लोकप्रिय हो रहा है। हालांकि इसे आकाशवाणी
प्रसारित करता है लेकिन साथ-साथ यह दूरदर्शन और निजी चैनलों के जरिए भी
अपनी छाप छोड़ रहा है। सरकार ने भी आकाशवाणी के गए दिन को बहुराने में
योगदान दिया है।
इस तरह से बहुरे दिन
1990 के दशक के बाद केबल और डीटीएच के शोर में रेडियो की आवाज थोड़ी दब गई थी। लेकिन 4 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो पर मन की बात करके रेडियो पर जमी धूल झाड़ने का काम किया।
अब हर महीने के आखिरी रविवार को पीएम के मन की बात करने से रेडियो को नया जीवन मिला। निजी क्षेत्र में एफएम रेडियो शुरू होने के बाद अब सरकार निजी रेडियो स्टेशनों पर समाचार प्रसारित करने की योजना भी बना रही है, जिससे रेडियो के दिन एक बार फिर बहुरने की उम्मीद जगी है।
सामुदायिक रेडियो भारत सरकार की एक ऐसी सोच का हिस्सा है, जिसमें समुदाय खुद का रेडियो स्टेशन स्थापित कर अपने आसपास एक सीमा के अंदर रेडियो पर कार्यक्रम प्रसारित कर सके। अभी देश में 170 सामुदायिक रेडियो स्टेशन काम कर रहे हैं और 250 नये स्टेशन लाइसेंस लेने की प्रकिया में हैं। मोदी सरकार के पहले बजट में सामुदायिक रेडियो को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सत्तर वर्ष तक भारत के करोड़ों श्रोताओं की मार्गदर्शक बनी बीबीसी हिंदी सेवा का 31 मार्च 2011 को शॉर्टवेव पर अंतिम प्रसारण किया गया।
अहम सूचनाओं का जरिया था रेडियो
1920 में भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत,
1923 में मुंबई के रेडियो क्लब द्वारा पहला कार्यक्रम प्रसारित,
1927 में मुंबई और कोलकाता में निजी स्वामित्व वाले दो ट्रांसमीटरों से प्रसारण सेवा की स्थापना,
1930 में सरकार ने इन ट्रांसमीटरों को अपने नियंत्रण में लिया,
1936 में इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो किया गया,
1957 से आकाशवाणी के नाम से पुकारा जाने लगा।
1930 में महात्मा गांधी ने रेडियो के जरिए देशवासियों को सत्य-अहिंसा का ज्ञान दिया,
15 अगस्त, 1947 को पं. जवाहरलाल नेहरू ने देश में आजादी की घोषणा सार्वजनिक की,
30 अगस्त, 1948 को महात्मा गांधी की हत्या की सूचना भी रेडियो के जरिए देशवासियों को मिली,
20 नवंबर, 1962 को चीन के हमले के वक्त पं. नेहरू ने देशवासियों के साथ खुलकर बात की,
1965 में इंदिरा गांधी ने आबादी नियंत्रण, अनाज की कमी के मुद्दे पर अपनी बात जनता के सामने रखी,
25 जून, 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रेडियो के जरिए देश में आपातकाल लगाए जाने की घोषणा की थी।