सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक तत्वों को खोजने के लिए सीबीआई को कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया की टेलीफोन पर राजनेताओं, बड़े उद्यमियों व अन्य लोगों से हुई बातचीत की बारीकी से जांच करने की जरूरत है। कोर्ट ने यह टिप्पणी टाटा समूह के पूर्व प्रमुख रतन टाटा की उस याचिका पर की है जिसमें उन्होंने राडिया के साथ उनकी फोन पर हुई बातचीत को टेप किए जाने को निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया है।
जस्टिस जीएस सिंघवी व जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की पीठ ने कहा कि यदि फोन के ट्रांसक्रिप्ट की बातचीत के कुछ अंशों पर गौर किया जाए तो वह निजी और सीधी-सादी प्रकृति के नहीं थे। यदि हम उन्हें पलटेंगे तो घंटों लग जाएंगे। इन ट्रांसक्रिप्ट में से आपराधिक तत्व निकाले जाने के लिए सीबीआई द्वारा बारीकी से जांच किए जाने की जरूरत है।
पीठ ने एजेंसी से सीबीआई के उन अधिकारियों के नामों के बारे में पूछा है जो इन दस्तावेज की जांच करने के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि सीबीआई की ओर से पेश होने वाले एडीशनल सॉलिसिटर जनरल हरेन रावल पीठ के इस सवाल का जवाब देने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं थे। रावल के पेश न होने पर नाराजगी जताते हुए पीठ ने सुनवाई को 13 फरवरी के लिए टाल दिया।
रावल हाईकोर्ट में एक मामले में पेश होने के लिए लखनऊ गए हैं। पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि गहनता से छानबीन सिर्फ संक्षिप्त बातचीत के अंशों की होगी जिनमें आपराधिक तत्व प्रतीत होगा और न्याय के हित से जुड़ा होगा।
पीठ ने यह निर्देश तब दिया जब रतन टाटा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि निजी बातचीत के अंशों को छानबीन के दायरे से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने टाटा और राडिया के बीच हुई तमाम बातचीत को निजी प्रकृति का बताया। हालांकि पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया कि आपराधिक तत्व की बातचीत क्या है, यह अदालत कानून के तहत तय करेगी।