गुवाहाटी हाईकोर्ट के सीबीआई को असंवैधानिक करार देने के फैसले पर केंद्र भले ही सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा हो, लेकिन सरकार के भीतर इसकी वैधता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी 2010 में लोकसभा में बतौर सांसद प्राइवेट मेंबर बिल के तहत सीबीआई को कानूनी जामा पहनाने की पुरजोर वकालत कर चुके हैं। उधर, एजेंसी के पूर्व निदेशक भी इसकी जरूरत को अहम बता रहे हैं।
तिवारी ने अपने बिल में कहा कि सीबीआई कानूनी तौर पर वैध संस्था नहीं है। बिल के मुताबिक सीबीआई को अंग्रेजों द्वारा बनाए गए पुराने कानून दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैबलिसमेंट एक्ट (डीपीएसए) के तहत जांच की ताकत मिली है। इसका असर आधुनिक जमाने के आर्थिक अपराध और आतंकवाद जैसे मामले की जांच में पड़ना लाजिमी है।
हालांकि तिवारी ने अपने इस प्राइवेट बिल की प्रतिक्रिया में शुक्रवार को कहा कि अब वह सरकार में मंत्री हैं लिहाजा इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि लोकसभा सदस्य होने के नाते उन्होंने सीबीआई को कानूनी वैधता देने की मांग उठाई थी, जो सदन के रिकार्ड में है।
सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिंदर सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने जो मुद्दा उठाया है उसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है। लेकिन इतने दिनों से एजेंसी जिस डीएसपीए कानून के तहत काम कर रही है, उसका भी एक ठोस आधार है।
सिंह के मुताबिक अगर सीबीआई असंवैधानिक होती तो सुप्रीम कोर्ट इसे और ताकत देने और इसे सरकार के प्रभाव से बाहर निकालने की बात नहीं करती।
सिंह ने कहा कि सीबीआई अपने सभी कानूनी लिखा पढ़ी का काम डीएसपीए के बैनर तले ही करती है। हालांकि यह अच्छा मौका है कि सरकार नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की तर्ज पर सीबीआई को भी संविधान से पास कानून के तहत ले आए।