पाकिस्तान में वहां की हुकूमत को खुली चुनौती दे रहे शिया धार्मिक नेता डॉ. मोहम्मद तारीक-उल-कादरी ने कनाडा प्रवास से पाकिस्तान जाने की योजना के दौरान भारत का दौरा किया था।
इस दौरान दिल्ली में उनकी मुलाकात अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ए रहमान खान, पूर्व रेल मंत्री सी के जाफर शरीफ और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जस्टिस मारकंडेय काटजू जैसी चुनिंदा शख्सियतों से हुई। कादरी ने दिल्ली के बाद मुंबई, बंगलुरू और हैदराबाद की भी यात्रा की।
हालांकि सरकारी सूत्र उनके भारत यात्रा की मुख्य वजह खुल कर नहीं बता रहे। न ही यह बता रहे कि वह भारत किसके बुलावे पर आए थे। लेकिन उनका दबी जुबान में कहना है कि वह पाकिस्तान के सुन्नी मुसलमानों का दबदबा झेल रहे शिया मुसलमानों के हक में समर्थन जुटाने आए थे।
21 जनवरी 2012 को दिल्ली के चाणक्यपुरी के डिप्लोमैटिक एनक्लेव स्थिति पांच सितारा होटल लीला में मुलाकात के दौरान कादरी ने अमर उजाला से पाकिस्तान के खस्ता हालात, आतंकवाद और उसमें इस्तेमाल किए जा रहे मानव बम के खिलाफ खुल कर बातें की। लेकिन उस बातचीत में कादरी ने पाकिस्तान में उनकी वापसी के सवाल को टाल दिया। उन्होंने कतई अंदाजा नहीं लगने दिया कि उनका इरादा पाकिस्तान जा कर अरब स्प्रिंग जैसे हालात पैदा करने की है।
कादरी भारतीय एजेंसियों की नजर में आए जब 14 मार्च 2012 को मुंबई में उनकी होने वाली सभा के खिलाफ वहां की कट्टर मुसलिम संस्था रजा एकेडमी ने तीखा विरोध दर्ज किया और उसे रोकने के लिए बंबई हाईकोर्ट में याचिका तक दायर कर दी। रजा एकेडमी की शिकायत थी कि कादरी मुंबई में भड़काऊ भाषण देंगे जिससे सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने का खतरा है। इसके बाद बंगलूरू और हैदराबाद में उनकी गतिविधियों को सीमित रखा गया।
दिल्ली के इंडिया इस्लामिक सेंटर में उनकी नई लिखी किताब फतवा ऑन टेरोरिजिम एंड सोसाइड बांबिंग के लिए सम्मानित भी किया गया था। इस सम्मेलन में सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका सादिया देह्लवी ने सूफी इस्लाम पर चर्चा की। इसी सम्मेलन में काटजू और उत्तरखंड के चीफ जस्टिस भी मौजूद थे।
उच्चस्तरीय सरकारी सूत्र के मुताबिक कांग्रेस नेता सी के जाफर शरीफ ने कादरी को सरकारी मेहमान बनाने की लांबिंग भी की थी। लेकिन केन्द्र सरकार ने इससे इनकार कर दिया। इसी यात्रा के दौरान कादरी राज्यसभा के पूर्व उप सभापति और वर्तमान अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रहमान खान के निजी भोज पर भी गए थे।
गौरतलब है कि करीब हजार किताबों के लेखक और आतंकवाद को इस्लाम के खिलाफ बताने वाले कादरी की शुरुआती तलीम पाकिस्तान में ही हुई। सैनिक शासक परवेज मुशर्रफ के सत्ताकाल तक कादरी पाकिस्तान में ही थे। लेकिन पाकिस्तानी हुक्मरान ने अचानक उन्हें पाकिस्तान से बाहर जाने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद से वह कनाडा में ही रह रहे थे। पंजाब मूल के कादरी की किताबों को अमेरिका और यूरोप में काफी पढ़ा जाता है।