आगामी वित्त वर्ष में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए उद्योग जगत ने अपने सुझाव वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के समक्ष पेश किए हैं। बजट पूर्व बैठक में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), फिक्की, एसोचैम समेत सभी प्रमुख औद्योगिक संगठनों ने कहा है कि सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार आए।
उद्योग जगत ने आगामी बजट में उत्पाद और सेवा कर की मौजूदा दर को बरकरार रखने को कहा है। सीआईआई के अध्यक्ष एडी गोदरेज ने सीमा शुल्क की अधिकतम दर 10 फीसदी पर रहने का सुझाव दिया है। जबकि उद्योग संगठन फिक्की की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कॉरपोरेट टैक्स और आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क की मौजूदा दर में बिना किसी फेरबदल के आगे भी जारी रखने की सिफारिश की है।
आयकर के लिए 20 लाख से अधिक की कमाई पर अधिकतम 30 फीसदी कर लगाने का सुझाव पेश किया गया है। संगठन का कहना है कि सरकार को ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाए। पिछले वर्ष उत्पाद और सेवा कर की दर को बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया था। फिक्की ने सिफारिश की है कि जीएसटी लागू होने तक इन दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाए।
सभी संगठनों ने किसी भी पुराने कर को फिर से लागू करने का पुरजोर विरोध किया है। संगठन ने नई सेवा कर की विसंगतियों को दूर करने की सिफारिशें भी पेश की है। उद्यमियों की सुझावों पर वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता निवेश की प्रक्रिया जारी रखना है।
उन्होंने कहा कि घरेलू और विदेशी निवेश सरकार के लिए केवल विकल्प नहीं बल्कि आर्थिक अनिवार्यता भी है। अर्थव्यवस्था के कुछ सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं लेकिन प्रत्यक्षता अभी भी काफी दूर है। इस मौके पर वित्त राज्यमंत्री समेत मंत्रालय के सभी आला अधिकारी भी मौजूद थे। उद्योगों की ओर से आनंद महिंद्रा, नितिन परांजपे, आरएन धूत, संदीप सोमानी, सोम मित्तल शामिल थे।