पंजाब में पुलिस की बर्बरता पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी तुलना अंग्रेज तानाशाहों से की। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि निहत्थे लोगों पर जलियांवाला बाग में ब्रिटिश पुलिस ने गोलियां चलाई थीं। उसके निशान आज भी मौजूद हैं। आजाद भारत में पंजाब पुलिस की कार्रवाई भी कुछ ऐसी ही है।
अदालत ने हाल ही में पंजाब के तरन तारन में एक लड़की की पिटाई और बिहार के पटना में शिक्षकों पर पुलिस लाठीचार्ज की घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए यह टिप्पणी की है।
शीर्षस्थ अदालत ने पुलिस सुधार पर दिए गए निर्देशों को अमल में लाने के मसले पर केंद्र और राज्य सरकारों से जबाव तलब किया। साथ ही केंद्रीय गृहसचिव सहित सभी राज्यों के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी किया।
जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ ने पंजाब सरकार की ओर से मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराए जाने की दलील पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य में पुलिस वैसी ही कार्रवाई कर रही है, जैसी अंग्रेजों के जमाने में होती थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निहत्थे लोगों पर कथित बर्बर रवैया अपनाने के मामले में केंद्र और सभी राज्य सरकारें सात दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करें।
पीठ ने विशेष तौर पर पंजाब के पुलिस महानिदेशक को मजिस्ट्रेट जांच कर निजी तौर पर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। दोनों राज्यों की दलीलों को नकारते हुए अदालत ने यह भी कहा कि हम जानते हैं कि जिन पुलिस वालों को निलंबित किया गया है, उनकी बहाली भी होगी और शायद उन्हें बाद में बहादुरी के लिए पुरस्कार भी मिले। यह हमारा अनुभव है।
सुप्रीम कोर्ट ने तरनतारन में पुलिस बर्बरता को झेलने वाली महिला को बहादुर बताते हुए कहा की महिलाओं के साथ हर हाल में पुलिस को इज्जत से पेश आना चाहिए। यहां तक कि उन्हें पीछे धकेले जाना भी स्वीकार योग्य नहीं है। पीठ ने पंजाब सरकार से पूछा कि क्या महिला आतंकवादी थी, जिसके खिलाफ पुलिस ने ऐसा रवैया अपनाया।
पीठ ने प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों पर अमल के संबंध में केंद्र और राज्य सरकारों के नोटिस जारी किया। प्रकाश सिंह मामले के निर्देशों को अमल में न लाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि उन निर्देशों पर फिर से गौर किया जाए।
तरनतारन की घटना में चार मार्च को एक ट्रक ड्राइवर और उसके साथियों ने एक लड़की के साथ अभद्र व्यवहार किया, लेकिन पुलिस के पास शिकायत करने पहुंची इस लड़की की पुलिसवालों ने बुरी तरह से पिटाई कर डाली।
दूसरी घटना में पांच मार्च को बिहार पुलिस ने पटना में विधानसभा के बाहर नौकरी में नियमित करने और समान वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे संविदा शिक्षकों पर लाठीचार्ज करने के बाद आंसू गैस के गोले दागे थे।