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फिर आसमान छूने को तैयार दाल के दाम, तेजी से बढ़ोत्तरी की आंशका

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सरकारी आंकड़ों में थोक व खुदरा दोनों ही महंगाई दर में गिरावट के बावजूद दाल की कीमत रिकार्ड स्तर को छूती जा रही है। सरकारी थोक महंगाई दर पिछले छह महीनों से शून्य से भी नीचे है, लेकिन दाल के भाव में पिछले एक साल में 125 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
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सरकारी प्रयास के बावजूद दाल केभाव थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अगस्त महीने में मौसम वैज्ञानिकों की तरफ से सामान्य से लगभग 25 फीसदी कम बारिश की घोषणा के बाद सभी प्रकार की दालों के दाम में 10-15 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हो गई।

दाल मिल मालिकों के मुताबिक सरकार की तरफ से समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो दाल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला फिलहाल थमने वाला नहीं दिखता है।

पिछले साल अगस्त महीने में अरहर दाल की खुदरा कीमत 70-75 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो इस साल अगस्त में 145-155 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।

उड़द दाल पिछले साल अगस्त में 70 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर थी, जो इस साल की समान अवधि में 140 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। चना दाल के भाव में पिछले एक साल में 90 फीसदी का इजाफा रहा।
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मसूर दाल की कीमत पिछले साल अगस्त में 65-70 रुपये प्रति किलोग्राम थी जो इस साल अगस्त आखिर में 105 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।
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कम बारिश से कीमत में रिकार्ड तेजी

इस साल फरवरी-मार्च के दौरान बेमौसम बारिश व मानसून में कमी की घोषणा के बाद दाल के दाम में अप्रैल आखिर व मई के आरंभ में तेजी से बढ़ोतरी हुई थी। अब अगस्त में सामान्य से कम बारिश और आगे भी कम बारिश की आशंका ने दाल के भाव में और तेजी ला दी है।

दिल्ली दाल मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक गुप्ता के मुताबिक अरहर दाल की फसल मुख्य रूप से महाराष्ट्र व कर्नाटक में होती है, लेकिन बारिश कम होने की वजह से अरहर के उत्पादन में इस साल 60 फीसदी तक की गिरावट हो सकती है। उन्होंने बताया कि अगले 15 दिनों में मध्य प्रदेश से उड़द दाल की आवक शुरू हो जाएगी।

ऐसे में उड़द के भाव में 10 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट हो सकती है। हालांकि अरहर दाल के भाव अभी तेज रहेंगे। सरकार ने 5,000 टन दाल का आयात किया है, जो 5 सितंबर तक भारत आ जाएगी, लेकिन इससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ेगा। भारत वैसे भी हर साल अपनी खपत के लिए लगभग 35 लाख टन दाल का आयात करता है।

भारत में दाल का सालाना उत्पादन 185 लाख टन है जबकि सालाना खपत 220 लाख टन है। दाल मिल मालिकों के मुताबिक इस साल घरेलू मांग की पूर्ति के लिए 50 लाख टन तक दाल का आयात करना पड़ सकता है।
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