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वैज्ञानिकों से पीएम मोदी का 'दिल मांगे मोर'

Mon, 30 Jun 2014 09:34 PM IST
एजेंसी/अमर उजाला, श्रीहरिकोटा
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार सुबह ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी सी23 का सफल प्रक्षेपण किया।
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44 मीटर ऊंचे, 230 टन वजनी और करीब 100 करोड़ रुपये की लागत वाले पीएसएलवी सी23 के जरिए पांच विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित किए गए।

इसमें फ्रांस का पृथ्वी निगरानी उपग्रह स्पात-7, जर्मनी का 14 किलोग्राम वजनी आइसैट उपग्रह-15, कनाडा के 15 किलोग्राम वजनी एनएलएस 7.1 और एनएलएस 7.2 उपग्रह और सिंगापुर का सात किलोग्राम वजनी वेलाक्स उपग्रह को प्रक्षेपित किया गया।

इसरो की व्यावसायिक इकाई एंट्रिक्स द्वारा फ्रांस, जर्मनी, सिंगापुर और कनाडा के साथ इसके लिए बाकायदा करार किया गया था।

35 विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण कर चुका है इसरो

यूरोपीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी ‘एयरबस डिफेंस एंड स्पेस’ ने फ्रांस के स्पात-7 का निर्माण किया है। यह फ्रांस के आकार के 10 गुने इलाके को कवर कर सकता है।

इसरो ने अब तक 19 देशों के 35 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया है। ये देश अल्जीरिया, अर्जेंटीना, आस्ट्रिया, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इस्राइल, इटली, जापान, कोरिया, लक्जमबर्ग, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, तुर्की और ब्रिटेन हैं।

पीएसएलवी सी23 ने 20 मिनट की निर्धारित अवधि में चार चरणों में 655 किमी की यात्रा पूरी की। प्रक्षेपण के साथ ही यान ने पहले चरण में फ्रांस के उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया और उसके बाद बारी बारी से अन्य चार उपग्रहों को भी कक्षा में स्थापित किया।
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'फिल्म ग्रैविटी से भी कम खर्चीला हमारा मिशन'

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को दुनिया में बेजोड़ बताते हुए कहा, "यह पूरी तरह से स्वदेशी होने के साथ ही कम खर्चीला भी है।"

मोदी ने कहा, "इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि हॉलीवुड फिल्म ग्रैविटी को बनाने में जितना खर्च आया, उससे भी कम हमारे मंगल अभियान का बजट है।"

3-डी फिल्म ग्रैविटी हादसे की वजह से अंतरिक्ष में फंसे दो अंतरिक्ष यात्रियों की कहानी है। इस फिल्म के निर्माण में 10 करोड़ डॉलर खर्च हुए थे।

पिछले साल 13 नवंबर को मंगलायन के प्रक्षेपण के बाद न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा था कि भारत का मंगल मिशन 7.5 करोड़ डॉलर का है, जो फिल्म ग्रैविटी के बजट का तीन चौथाई है।
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