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प्रदर्शनकारियों के हौसले के आगे मौसम भी पस्त

Wed, 02 Jan 2013 09:09 AM IST
नई दिल्ली/ अमर उजाला ब्यूरो
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 ‘मंजिल न दे, चिराग न दे, हौसला तो दे...’, इन पंक्तियों के ठीक उलट दिल्ली की हाड़ कंपाने वाली सर्दी में युवक-युवतियां न्याय की मांग करते दिखे। बस मोमबत्ती की टिमटिमाती रोशनी थी और ढेर सारा हौसला।
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गैंग रेप पीड़िता के लिए लड़ने वाले इन युवाओं ने नए साल का स्वागत ‘वी वांट जस्टिस’ के नारे से किया है। एक ओर ठंड में जहां लोग घरों में दुबके हुए थे, वहीं आंदोलनकारी इस विकट मौसम में मुद्दे को ठंडा नहीं होने देने के संकल्प के साथ जागते रहे।

हाथों में मोमबत्तियां थामे छात्र-छात्रा जेएनयू से मुनिरका के लिए पैदल मार्च पर निकले। नए साल के जशभन में शरीक होने की जगह लोगों ने महिलाओं के लिए आवाज उठाई। वह सिर्फ दुखी ही नहीं, नाराज भी थे। इस सवाल के साथ कि ये अत्याचार कब थमेंगे, महिलाएं कब इंसान समझी जाएंगी? मंगलवार तड़के तक गम और खामोशी के बीच लोगों ने हक की मांग की।
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उधर, जंतर-मंतर पर मध्य रात्रि में मोमबत्तियां जल रहीं थीं और खुले आसमान के नीचे फर्रुखाबाद व बरेली के दो व्यक्ति लेटे थे। अनशन का नौवां दिन था। इनके लिए कुछ खास मायने न तो नए वर्ष का था, न ही गिरते पारे का। बिगड़ी सेहत के बीच दोनों अनशन जारी रखने पर अड़े थे। लोगों की गुजारिश के बावजूद।

दिन चढ़ते ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर बाद कई समूहों में लोग जंतर-मंतर पहुंचे और मृतका को श्रद्धांजलि दी। इस बीच अगर किसी ने उत्साहित होकर इंडिया गेट की तरफ बढ़ने का नारा लगाया तो लोगों ने उन्हें शांत करके बैठा दिया। इसी मसले पर दोपहर बाद दो गुटों में कुछ कहासुनी भी हुई, लेकिन बड़े मुद्दे का वास्ता दिलाकर लोगों ने उन्हें शांत करा दिया।
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