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महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम नहीं करने देंगे, शुरू हुआ विरोध

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परिवार को छोड़कर महिला कर्मचारियों के नाइट शिफ्ट में काम करने के विरोध में तमाम श्रमिक संगठन मैदान में उतर आए हैं। उनकी दलील है कि महिला कर्मचारियों के नाइट शिफ्ट में काम करने से पारिवारिक ढांचे के प्रभावित होने का डर है।
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दुनिया में परिवार के सर्वश्रेष्ठ मॉडल माने जाने वाले भारतीय परिवार के बिखराव और पारिवारिक माहौल के बिगड़ने की नौबत तक आ सकती है।

महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की छूट देने संबंधी सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ भारतीय मजदूर संघ ने यह दलील दी है। वहीं, वामपंथी भी महिलाओं पर काम के दोहरी मार और सुरक्षा कारणों से इसके पक्ष में नहीं हैं।

श्रम संगठनों ने इस संदर्भ में कारखाना अधिनियम में किए जा रहे संशोधन का विरोध किया है। उन्होंने इस संशोधन को वापस लेने की अपील श्रम मंत्रालय से की है। उनका कहना है कि महिलाओं का दफ्तर या कारखानों में दिन के समय ही काम करना बेहतर होगा।
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महिलाओं पर परिवार की ज्यादा जिम्मेदारी

भारतीय मजदूर संघ के बृजेश उपाध्याय का कहना है कि महिलाओं पर परिवार की ज्यादा जिम्मेदारी होती है। पारिवारिक ढांचे को मजबूत बनाने में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

रात में घर से दूर होने का सीधा असर परिवार की शांति और एकजुटता पर पड़ेगा। वहीं सुरक्षा की दृष्टिकोण से भारत की स्थिति अभी इतनी बेहतर नहीं है कि पुरूषों की तरह महिलाओं को रात में काम पर रखा जाए।

इसलिए उनके लिए केवल दिन में काम करने का प्रावधान होना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि अगर सरकार कानून में संशोधन कर महिलाओं के लिए भी नाइट शिफ्ट का रास्ता खोलती है तो कई कंपनियां महिलाओं को रात में अनिवार्य रूप से ड्यूटी पर रखने लगेंगी। इससे महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले बढ़ने की आशंका ज्यादा है।

'नाइट शिफ्ट को अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए'

अखिल भारतीय मजदूर संगठन के महासचिव पूर्व सांसद गुरुदास दासगुप्ता ने भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर इस प्रस्ताव पर अपनी असहमति जताई है। माकपा की वरिष्ठ नेता वृंदा करात महिलाओं को रात में काम करने की आजादी देने के पक्ष में हैं।

उनका कहना है कि अगर महिलाओं को बराबरी का अधिकार देना है तो उनके सामने इस तरह के विकल्प दिए जा सकते हैं लेकिन महिलाओं के नाइट शिफ्ट को अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए।

नाइट शिफ्ट करने से उन पर घर और बाहर काम की दोहरी मार पड़ेगी। ऐसी व्यवस्था केवल महिलाओं की मर्जी से सुरक्षा की गारंटी होने पर ही किया जाना चाहिए।
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उद्योग जगत भी इसके लिए सहमत

वहीं श्रम मंत्रालय महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट का रास्ता खोलने के प्रस्ताव को लेकर दृढ़ है। मंत्रालय का तर्क है कि इस तरह महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

श्रम सचिव शंकर अग्रवाल का कहना है कि सरकार महिलाओं को रोजगार और सुरक्षा दोनों एक साथ देना चाहती है। नाइट शिफ्ट में दफ्तर आने-जाने के लिए परिवहन व्यवस्था, कार्यालय या कारखाने में काम करने के लिए महिलाओं के अनुरूप माहौल तैयार करने, विशाखा दिशानिर्देश को अनिवार्य रूप से लागू कराने और कार्यालय में सीसीटीवी लगाने जैसे सुरक्षा कारकों को दुरुस्त कराकर ऐसी व्यवस्था की जा सकती है। उद्योग जगत भी इसके लिए सहमत है।
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