पति की संपत्ति में तलाकशुदा महिला के हक को लेकर न केवल सड़क बल्कि कैबिनेट के अंदर भी विरोध की स्थिति है।
इन प्रावधानों के खिलाफ लोगों ने बुधवार को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया।
वहीं सात रेसकोर्स के अंदर हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस मुद्दे पर अपने ही कई मंत्रियों के विरोध से रूबरू होना पड़ा।
विवाह कानून (संशोधन) बिल के प्रावधानों पर विरोध को देखते हुए कैबिनेट कोई फैसला नहीं ले सकी। इसके चलते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बिल पर आमराय बनाने के लिए इसे मंत्रियों के समूह (जीओएम) के हवाले कर दिया।
बैठक के बाद वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बताया कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में विधेयक के मसौदे पर लंबी चर्चा हुई लेकिन किसी सहमति पर नहीं पहुंचा जा सका। इसलिए इसको को जीएमओ को सौंप दिया गया।
कानून मंत्रालय ने सुझाव दिया था कि तलाकशुदा महिला को भी उसके पति की आवासीय संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए। इसमें उसकी विरासत वाली और विरासत योग्य आवासीय संपत्ति शामिल है।
इस प्रावधान का महिला और बाल विकास मंत्रालय ने विरोध किया है। उसका सुझाव है कि विरासत वाली संपत्ति और विवाह से पूर्व पति की अर्जित संपत्ति में महिलाओं के अधिकार को कानून में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
बैठक में प्रस्तावित संशोधनों पर करीब दो घंटे तक चर्चा हुई लेकिन मंत्रिमंडल में उपस्थिति पुरुष व महिला मंत्रियों के विचार अलग-अलग थे। हालांकि चिदंबरम ने कहा कि जब सदस्य अलग अलग विचार रखें तो इसका मतलब मतभेद नहीं होता है।
प्रधानमंत्री ने विधेयक के एक-दो प्रावधानों पर गौर करने के लिए मंत्रियों के समूह को सौंप दिया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि मंत्री समूह अगले कुछ दिनों में इन प्रावधानों पर विचार करेगा और उसके बाद विधेयक फिर से कैबिनेट में आएगा।
कैबिनेट में जिस समय बिल पर चर्चा हो रही थी, उसी समय प्रधानमंत्री आवास के बाहर कुछ लोगों ने बिल के विरोध में प्रदर्शन किया और नारेबाजी की।