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स्प्रे छिड़कने वाले नेताजी की कहानी

Thu, 13 Feb 2014 06:58 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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तेलंगाना बिल के मुद्दे पर बवाल होना तय था और सरकार एक हद तक इसके लिए तैयार भी थी। लेकिन उसे यह अंदाजा कतई नहीं होगा कि गुरुवार को जब देश की सबसे बड़ी पंचायत बैठेगी, तो सत्र खत्म होने के बाद सांसदों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ जाएगी।
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मारपीट किसी एक या दो सांसद ने नहीं की। तेलंगाना समर्थक और सीमांध्र के सांसदों के बीच जमकर हाथापाई और बीच-बचाव करने वाले भी इसमें लपेट लिए गए। शीशे तोड़े गए, माइक तोड़कर पेट में डालने की कोशिश हुई और टेबल पर चढ़ा गया।

तमाशे के बीच जिस शख्स के कारण कई सांसदों की आंखें बंद हो गई, उनका नाम है एल राजगोपाल। ये नेताजी अपनी जेब में पेपर स्प्रे की बोतल लेकर सदन में दाखिल हुए थे और जैसे ही बिल पेश करने की कोशिश हुई, उन्होंने सांसदों की आंखों पर यह स्प्रे कर दिया। आज बदनाम हुए राजगोपाल का अतीत भी काफी दिलचस्प है और उनकी संपत्ति जानकर हैरत में पड़ सकते हैं।
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लैंको इंफ्राटेक के मालिक थे राजगोपाल

सदन में पेपर स्प्रे छिड़कने के बाद चार सांसदों को उपचार के लिए ले जाना पड़ा। जख्मी हुए सांसदों में स्प्रे छिड़कने वाले एल राजगोपाल भी शामिल हैं। आखिर यह राजगोपाल हैं कौन?

विजयवाड़ा से सांसद राजगोपाल मेकेनिकल इंजीनियर हैं, जो इससे पहले लैंको इंफ्राटेक कंपनी की अगुवाई कर रहे थे। उन्होंने नए राज्य के गठन का विरोध किया था। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक वह 1985 में कंपनी में शामिल हुए और उसे कंस्ट्रक्‍शन बिजनेस से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे संबंधित सेगमेंट तक ले गए।

राजगोपाल ने कांग्रेसी नेता पी उपेंद्र की बेटी से 90 के दशक की शुरुआत में शादी रचाई। 2002 में वह लैंको इंफ्राट्रेक के प्रमुख के पद से हट गए और नेता बनने का फैसला किया। उन्होंने कांग्रेसी टिकट पर चुनाव लड़ा था।

300 करोड़ के मालिक हैं स्प्रे छिड़कने वाले

राजगोपाल आंध्र प्रदेश के सबसे अमीर सांसद हैं और उनकी कुल जायदाद 299 करोड़ रुपए हैं। पहली बार साल 2004 में विजयवाड़ा सीट जीतने के बाद वह दूसरी बार भी जीत हासिल करने में कामयाब रहे, जबकि क्षेत्र में कांग्रेस को लेकर विरोध का माहौल था।

उनके विरोधियों का कहना है कि तेलंगाना न बने, इसमें राजगोपाल का निजी स्वार्थ है। उनका हैदराबाद और तेलंगाना में भारी निवेश है और अगर अलग तेलंगाना बनता है, तो इससे उन्हें काफी नुकसान हो सकता है।

तेलंगाना बनाए जाने का विरोध करने और सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के कारण राजगोपाल को पांच अन्य सांसदों के साथ कांग्रेस से कल बर्खास्त कर दिए गए थे।

सबसे पहले भेजा था इस्तीफा

सीमांध्र क्षेत्र से आने वाले ये सांसद 5 फरवरी से शुरू हुए शीतकालीन सत्र का दूसरे हिस्सा शुरू होने से ही विरोध जता रहे थे। विजयवाड़ा के सांसद खुलकर तेलंगाना का विरोध कर रहे हैं। बीते कुछ साल से उनके विरोध ने आक्रामक रुख ले लिया।

राजगोपाल ने आंध्र का बंटवारा करते वक्‍त सीमांध्र के नेताओं की बात न सुनने को लेकर पार्टी आला कमान पर भी हमला बोला था। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री एन किरण कुमार रेड्डी को संसद का सत्र खत्म होने तक इस्तीफा न देने को कहा था।

पी चिदंबरम ने जब ऐलान किया था कि केंद्र ने तेलंगाना राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, तो राजगोपाल अपना इस्तीफा भेजने वाले पहले सांसद थे। उन्होंने कहा था कि अगर तेलंगाना का मुद्दा उठाया गया, तो वह संसद में 'कबड्डी' खेलेंगे।
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चाकू निकालने वाले सांसद भी बेहद अमीर

इस बीच टीडीपी सांसद एम वेणुगोपाल रेड्डी ने वेल में चाकू निकालकर खुदकुशी की कोशिश भी की। हालांकि, बाहर निकलकर उन्होने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने चाकू जैसी कोई चीज निकाली।

वह आंध्र के नरसराओपेट सीट से सांसद हैं। कुछ दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि उनकी कंपनी रामकी इंफ्रा के दो बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट हैं। इनमें से एक अदीलाबाद जिले में 229 करोड़ की परियोजना है।

दिलचस्प है कि केंद्रीय कपड़ा मंत्री और कांग्रेस सांसद कावुरु संबाशिवा राव की प्रोग्रेसिव कंस्ट्रक्‍शंस तेलंगाना में रेड्डी के 2536 करोड़ की जेवी परियोजना में दखल रखते हैं।

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