केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने फैसला किया है कि अब दुकानों पर खुली सिगरेट नहीं बिकेंगी। यानी अगर सिगरेट खरीदनी है तो पैकेट ही खरीदना होगा।
क्या होगा अगर अगर खुली सिगरेट की बिक्री पर रोक लग गई? पढ़िए इसके कुछ दिलचस्प संभावित असर पर एक नज़र।
1- सिगरेट के छोटे-छोटे पैकेट
आप में से ज्यादातर ने ध्यान न दिया हो लेकिन बीड़ी के छोटे पैकेट पहले से ही बाजार में हैं। जबकि सिगरेट 10 और 20 के पैकेट में ही मिलते हैं। खुली सिगरेट की बिक्री का तोड़ निकालने के लिए कंपनियां सिगरेट के छोटे पैकेट भी ला सकती है जिसमें तीन से पांच सिगरेट का पैक भी मिलना शुरू हो सकता है।
2- उधार मांगना बढ़ेगा
यदा कदा सिगरेट पीने वालों को खुली सिगरेट नहीं मिलेगी तो वह अपने दोस्तों से मांगकर सिगरेट पिएंगे। इसके अलावा ऐसा भी हो सकता है कि लोग मिलकर भी सिगरेट का पैकेट खरीदने लगें। यानी इससे कामकाज की जगह पर भाईचारा बढ़ेगा या फिर मांगने वालों से लोग कतराने लगेंगे।
3- पुलिस करेगी वसूली
कोई भी कानून बने तो उसका पालन करवाने की जिम्मेदारी पुलिस की होती है। और कानून का पालन कैसे होता है यह हम सब जानते हैं। चाहे तो गुटखा का उदाहरण देख लीजिए। ऐसे में सिगरेट बेचने वालों पर पुलिस की वसूली बढ़ सकती है। अब पुलिस वाला जब भी किसी दुकान में खुली सिगरेट देखेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय कुछ खर्च मांगेगा।
4- बीवी खुश हो सकती है
खुली सिगरेट की बिक्री से सबसे ज्यादा खुशी सिगरेट पीने वाले पतिओं की बीवियों को होगी। क्योंकि वह घर में तो पीने नहीं देतीं और बाहर भी खुली सिगरेट मिलना नामुमकिन हो जाएगा। कई लोग बीवी के डर से सिगरेट का पैकेट साथ में नहीं रखते ऐसे उनको इस बुरी लत से छुटकारा पाने का अच्छा मौका होगा। हालांकि ये भी हो सकता है कि कई पतियों का सिगरेट पीना ही छूट जाए। हालांकि खतरा ये भी है वे पैकेट खरीदकर ज्यादा सिगरेट पीने लगें।
5- पैकेट छुपाने की चिंता बढ़ेगी
सिगरेट पीने वाले काफी लोग अपने घर या पत्नियों से छुपाकर सिगरेट पीते थे। इसके लिए उन्हें खुली सिगरेट खरीदनी होती थी क्योंकि वह पैकेट घर नहीं ले जा सकत थे। लेकिन अब ऐसे लोग खुली सिगरेट न मिलने से पूरा पैकेट खरीद सकते हैं और उन्हें इसे छुपाने की भी चिंता सताने लगेगी। गाड़ी की डिक्की में रखें, कार के ग्लब्स बॉक्स में या फिर ऑफिस बैग में लैपटॉप के पीछे?
6- च्यूइंगम की बिक्री पर असर
बहुत से लोग सिगरेट पीने के बाद गंध छिपाने के लिए सिगरेट पीने के बाद च्यूइंगम खाकर घर चले जाते हैं। जो लोग खुली सिगरेट न मिलने की वजह से सिगरेट पीना छोड़ेंगे वो अब च्युइंगम भी नहीं खाएंगे। लेकिन कुछ लोग सिगरेट के विकल्प के रूप में च्युइंगम खाना भी शुरु कर सकते हैं। ऐसे में च्युइंगम और टॉफियों की बिक्री बढ़ सकती है।
7- नशामुक्ति केंद्रों में भीड़
जाहिर सी बात है कि जब लोगों को खुली सिगरेट नहीं मिलेगी तो कुछ लोग सिगरेट छोड़ने का भी मन बना सकते हैं। लोगों के इस निर्णय से नशामुक्ति केंद्रों में अचानक भीड़ बढ़ सकती है और वे सिगरेट छुड़ाने के तरीके सीखने की कोशिश कर सकते हैं. इससे नशा छुड़ाने का दावा करने वाले लोगों का धंधा भी फायदा में जा सकता है।
8- बढ़ सकती है ई-सिगरेट की मांग
शौकिया तौर पर या चोरी छिपे सिगरेट पीने वालों को जब खुली सिगरेट नहीं मिलेगी तो निकोटिन की पूर्ति के लिए ई-सिगरेट की ओर मुड़ सकते हैं जिससे ई-सिगरेट की डिमांड बढ़ सकती है। हालांकि ई-सिगरेट तंबाकू की सिगरेट से ज्यादा नुकसान देह बताई जाती है जिससे नशा करने वालों का नुकसान ज्यादा हो सकता है।
9- घर में बचत बढ़ेगी
खुली सिगरेट की बिक्री की रोक की एक अच्छी बात यह हो सकती है कि शौकिया तौर पर या चोरी छिपे सिगरेट पीने वालों का खर्च घट सकता है और उनकी बचत बढ़ सकती है।एक आदमी अगर दो-तीन सिगरेट रोज पीता था तो एक महीने में उसकी बचत औसतन 700 रुपए तक हो सकती है। लेकिन अगर सिगरेट की पैकेट खरीदने का सिलसिला शुरु हो जाए तो खर्च बढ़ भी सकता है।
10- टैक्स कम होगा
सरकार को सिगरेट और तंबाकू उत्पाद से मिलने वाला टैक्स कम हो सकता है क्योंकि खुली सिगरेट की बिक्री पर रोक से सिगरेट की बिक्री घटेगी। जो सरकार का लक्ष्य भी है। हालांकि सरकार अपनी इनकम ठीक रखने और सिगरेट की बिक्री कम करने के लिए इस टैक्स भी बढ़ा सकती है।
11- एक और कानून का उल्लंघन
खुली सिगरेट की बिक्री का सबसे बड़ा परिणाम एक और कानून का उल्लंघन होगा। इससे पहले सरकार ने पॉलीथीन और गुटखे की बिक्री पर रोक लगाया था लेकिन अभी तक भी पॉलीथीन और गुटखा खुले तौर पर बिक रहा है। इसी तरह खुली सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध का हश्र होगा. एक अनुमान है कि इस समय देश में 70 से 80 लाख पान के ठेल और गुमटियां हैं जहां खुली सिगरेट बिकती है। प्रतिबंध के बाद इन पर लगाम लगाने के लिए कोई ढांचा सरकारों के पास मौजूद नहीं है।