कर्नाटक में लोकायुक्त की अदालत ने मैसूर-बंगलूरू एक्सप्रेस-वे के लिए नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरीडोर इंटरप्राइस (एनआईसीई) को अधिक भूमि आवंटित करने के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और केंद्रीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा की भूमिका के जांच के आदेश दिए हैं। देवगौड़ा और कृष्णा राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
न्यायाधीश एनके सुधींद्र राव ने बृहस्पतिवार को देवगौड़ा और कृष्णा के खिलाफ जांच के आदेश देने के साथ ही एनआईसीई के लिए टोल वसूलने वाली दो निजी कंपनियों उमंग और अजमेरा की संपत्ति अटैच करने के भी निर्देश दिए। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि लोकायुक्त अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक द्वारा की जाने वाली इस छानबीन में पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, भाजपा और कांग्रेस के कुछ मंत्रियों, आला अधिकारियों और एनआईसीई के प्रमुख अशोक खेनी की भूमिकाओं की भी जांच होनी चाहिए।
गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता टीजे अब्राहम ने एनआईसीई के खिलाफ याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि कंपनी को जरूरत से अधिक भूमि आवंटित की गई है और सड़क निर्माण में उचित सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया है।