लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हालत भले ही पतली मानी जा रही है मगर रायबरेली में रहकर ही प्रियंका गांधी वाड्रा के दागे जा रहे शब्दों के सियासी तीर ने यहां सुदूर बिहार के गांव-शहरों की राजनीतिक चर्चा में अचानक नई चाशनी लगा दी है।
एक ओर नमो मंत्र तो दूसरी ओर माई (मुस्लिम व यादव) समीकरण के बीच चौक-चौराहे और बाजारों की बहस में प्रियंका बीते तीन-चार दिनों में मोदी को लेकर किए गए प्रहारों की वजह से खूब चर्चाएं बटोर रही हैं।
प्रियंका की वजह से सियासी बहस के बाजार में अचानक कांग्रेस के चर्चा में आने से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के चेहरे पर खुशी लौट आई है।
प्रियंका गांधी के बयानों पर हो रही गरमा गरम बहस
सारण क्षेत्र में राबड़ी देवी के खिलाफ मैदान में उतरे भाजपा दिग्गज राजीव प्रताप रूडी के जनसंपर्क अभियान के लिए रेवा घाट के हाईवे पर उनका इंतजार कर रहे समर्थकों की भीड़ के बीच सामने चाय की दुकान पर नरेंद्र मोदी और प्रियंका गांधी में चले बाणों के तीर पर गरमा गरम बहस चल रही थी।
इस बहस को कोई सही तो कोई बेतुका ठहरा रहा था। तभी करीब साठ वर्षीय जुगल देव सिंह कहते हैं कि भई एक बात तो माननी पड़ेगी कि प्रियंका की बातों से कांग्रेस चर्चा में तो आ ही गई है।
आगे बढ़ते हुए वे यह भी कहते हैं कि राहुल गांधी बिहार आकर भी वह असर नहीं पैदा कर सके जो प्रियंका ने रायबरेली से ही कर दिया है। हालांकि वे यह बताने से भी गुरेज नहीं करते कि उनका झुकाव इस बार तो नमो की ओर है।
'प्रियंका पहले उतरती तो नमो हवा इतनी तेज न होती'
इसी क्षेत्र के मकेर बाजार मेन रोड पर आस-पास ही बने भाजपा, राजद और जदयू के चुनाव कार्यालयों के बीच चाय-पकौड़ी की दुकान चलाने वाले सोनेलाल राउत दिन भर ऐसी ही बहसों से रूबरू होते रहते हैं।
क्षेत्र का मूड क्या है यह पूछने पर वह छूटते ही जवाबी सवाल दागते हैं कि ये प्रियंका क्या बिहार भी आ रही हैं? जवाब नहीं मिलने पर वे कहते हैं कि बीते तीन-चार दिन से प्रियंका और मोदी को लेकर नेता लोग खूब बतियाते हैं।
रूडी का चुनावी जमघट को देखने के लिए टोपी लगाए खड़े छपरा के फल विक्रेता मोहम्मद शफीकुल्ला कहते हैं कि कांग्रेस ने देर कर दी अगर राहुल की जगह प्रियंका को उतारती तो नमो हवा इतनी तेज न होती।
प्रियंका के मैदान में उतरने से कांग्रेस उम्मीदवारों में उत्साह
बिहार कांग्रेस की प्रवक्ता भावना झा हालांकि इस राय से इत्तेफाक नहीं रखतीं, मगर यह जरूर मान रही हैं कि प्रियंका के मोदी पर प्रहारों ने यहां मैदान में उतरे कांग्रेस उम्मीदवारों में उत्साह का संचार किया है।
प्रियंका की वजह से सियासी चर्चाओं के बाजार में लौटने के साथ कांग्रेस के लिए बिहार से राहत की दूसरी खबर यह है कि चाहे देश के बाकी प्रदेशों में उसकी हालात खस्ता है, मगर बिहार में कम से कम 8 सीटों पर वह मुकाबला दे रही है।
किशनगंज और सासाराम के अलावा सुपौल, मुजफ्फरपुर जैसी सीटों पर भाजपा के साथ कांग्रेस सीधी कांटे की लड़ाई में है।
कांग्रेस बिहार में 8 सीटों पर मुकाबले में
हाजीपुर सीट पर भी लोजपा उम्मीदवार रामविलास पासवान को कांग्रेस के प्रत्याशी से कड़ी टक्कर मिल रही है।
करीब दो दशक बाद कांग्रेस पहली बार बिहार में इतनी सीटों पर मुकाबले में है।
राजद के साथ कांग्रेस का गठबंधन और लालू के माई समीकरण के फिर से उनके पास लौटने की वजह से कांग्रेस को बिहार में यह संजीवनी मिल रही है।