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जानिए, प्रियंका ने दिया मौका तो फायदा उठाने के लिए क्यों पिल पड़े मोदी?

Wed, 07 May 2014 01:53 AM IST
रत्नेश्वर पांडेय/अमर उजाला, सिद्धार्थनगर
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अमेठी में सोमवार की सभा में नरेंद्र मोदी के वक्तव्य पर नीच राजनीति करने का प्रियंका गांधी का आरोप ऐसे समय आया, जब नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल में अपने दौरे तेज कर दिए हैं।
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मंगलवार को मोदी के भाषणों के केंद्र में प्रत्यक्ष रूप से प्रियंका के बयान का जवाब था मगर परोक्ष कोशिश दलित मतदाताओं को साधने की थी।

दलित समाज के अतीत के ब्योरे मोदी के भाषणों में नया तत्व थे। जनवरी में गोरखपुर में हुई रैली में भी मोदी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के नतीजे का हवाला देकर आदिवासी और दलित बहुल इलाकों में भाजपा को मिली सीटों को बड़ी उपलब्धि बताया था और यह साबित करने की कोशिश की थी कि दलितों का भाजपा पर भरोसा बढ़ रहा है।

नौ लोकसभा क्षेत्रों में दलितों की बहुतायत

गोरखपुर और बस्ती मंडल के नौ लोकसभा क्षेत्रों में कई जगह दलितों और आदिवासियों की बहुतायत है। 2009 के चुनाव में देवरिया, बस्ती, सलेमपुर और संतकबीरनगर की सीटें बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई थीं।

महाराजगंज, कुशीनगर और सिद्धार्थनगर की सीटें कांग्रेस ने जीतीं। भारतीय जनता पार्टी के हिस्से में गोरखपुर और बांसगांव की दो सीटें ही आईं थी। इस दफा के चुनाव में भाजपा पूर्वांचल की नौ सीटों पर 2009 से उलट नतीजे चाहती हैं।

उसकी निगाह इस इलाके के दलित और पिछड़े वर्ग पर है। प्रदेश की कई सीटों पर भाजपा और बसपा की सीधी लड़ाई की बात साफ हो जाने के बाद जहां मोदी के भाषणों में गुजरात मॉडल से ज्यादा वक्त दलित और पिछड़ों को मिलने लगा है, वहीं 17 फीसदी दलित मतों की हिस्सेदारी वाले सिद्धार्थनगर में बोलने की बारी आते ही मोदी के दलित प्रेम का प्रतिशत और बढ़ गया।
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प्रियंका की 'नीच राजनीति' बनी मोदी की 'नीच जाति'

इस बीच प्रियंका गांधी के बयान ने मोदी को बसपा के वोट बैंक में सेंधमारी का सीधा मौका दे दिया। प्रियंका के बयान में शामिल ‘नीच राजनीति’ को ‘नीच जाति’ का संबोधन देते हुए मोदी ने न सिर्फ दलितों को पुरखों के जमाने की रूढ़ परंपराएं याद दिलाकर उनसे हमदर्दी जताई बल्कि खुद को नीच जाति का बताते हुए भाजपा के शासन में हर घर में टॉयलेट का वादा करके खुले में शौच से समस्याएं झेलने वाली महिलाओं का दिल जीतने की कोशिश भी की।

वह बोले, ‘निचली जातियों में अभी भी महिलाएं खुले में शौच जाती हैं। मुझे तकलीफ होती है। मां-बहनों का सम्मान होना चाहिए। इनके पास मकान नहीं है। प्रधानमंत्री ऐसा होना चाहिए जो इनके आंसू पोछ सके। मोदी के दलित प्रेम का यही अंदाज महराजगंज की सभा में भी नजर आया। हालांकि बांसगांव संसदीय सीट के लिए रुद्रपुर (देवरिया) की सभा में उनका जोर कांग्रेस के साथ-साथ सपा और बसपा को कोसने पर था।

भाजपा शासन में बदलाव का सपना दिखाते उन्होंने देवरिया में किसान और गरीब के उत्थान की बात तो कहीं लेकिन निचली जाति जैसे शब्दों के इस्तेमाल से परहेज रखा। स्क्रिप्ट के इस बदलाव की वजह देवरिया में कलराज मिश्र का चुनाव माना जा रहा है। जानकार मानते हैं कि भले ही रुद्रपुर की सभा बांसगांव सीट की थी लेकिन उसमें देवरिया जिले के लोगों की मौजूदगी और कलराज मिश्र के चुनाव का आधार ब्राह्मण वोट बैंक होने के कारण जगह के मुताबिक मोदी की वाणी बदलती रही।
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