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महिला सुरक्षा पर गंभीर नहीं हैं प्रधानमंत्री

Sat, 12 Oct 2013 01:26 AM IST
प्रियंवदा सहाय/नई दिल्ली
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महिलाओं के खिलाफ हिंसा और शोषण के विरोध में भले ही प्रधानमंत्री के बयान कई दफा सुर्खियों में रहे हों मगर
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इस मुद्दे पर उनके बयानों की गंभीरता हकीकत से दूर ही है।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली नेशनल मिशन अथॉरिटी (एनएमए) की पिछले तीन साल में एक भी बैठक नहीं हुई है।

इसमें शामिल सदस्यों के कामकाज की कोई जिम्मेदारी भी अब तक तय नहीं की गई है। हालांकि 2010 में इस प्राधिकरण का गठन करते समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक विकास और उनके सशक्तिकरण के लिए अपनी प्रतिबद्धता जरूर प्रकट की थी।

यह भी कहा गया था कि महिलाओं से संबंधित सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों में तारतम्यता लाने में यह प्राधिकरण महत्वपूर्ण साबित होगा।

माना जा रहा था कि प्रधानमंत्री की सीधी दखल के कारण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, हिंसा की घटनाओं को रोकने, स्वास्थ्य, शिक्षा, लिंग अनुपात को बेहतर करने में एनएमए की भूमिका गंभीर होगी।
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लेकिन निर्भया कांड और हाल के दिनों में तेजाबी हमलों के बढ़ने के बावजूद प्रधानमंत्री ने इस प्राधिकरण की ओर एक दफा भी मुड़कर नहीं देखा।

लक्षित वर्ग तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में कोई अड़चन नहीं आए इसलिए तमाम मंत्रालयों को भी इसमें शामिल किया गया।

इसके अलावा डॉ मोहिनी गिरि, डॉ श्यामा चोना, गोमती नायर, डॉ मीरा शिवा और रंजना कुमारी जैसी सामाजिक कार्यकर्ता भी एनएमए में शामिल हैं।

एनएमए में शामिल सदस्यों का कहना है कि पिछले कुछ समय में हिंसा के कई मामले सामने आने के बावजूद एनएमए की एक भी बैठक नहीं हुई है।

यही वजह है कि एनएमए की रणनीति और शामिल सदस्यों की जिम्मेदारी भी तय नहीं हो सकी है। मालूम हो कि सरकार ने 2010 में आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री के रोसैया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए गठित एनएमए का सदस्य बनाया था।
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एनएमए में शामिल मंत्रालय और विभाग योजना आयोग, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, आवास व शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, पंचायती राज, कृषि मंत्रालय, स्वास्थ्य, लघु उद्योग मंत्रालय, कानून मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, श्रम मंत्रालय और राष्ट्रीय महिला आयोग
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