असहिष्णुता पर जारी बहस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत ने विश्व को संप्रदायवाद नहीं बल्कि आध्यात्मिकता दी है। संतों और ज्ञानियों ने हमेशा राष्ट्र धर्म को अपनाया है। उन्होंने अफसोस भी जताया कि दुनिया ने भारत के लोगों को समझने में भूल की।
प्रधानमंत्री ने रविवार को जैन संत आचार्य रत्नासुंदरसुरीजी महाराज की 300वीं किताब का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये विमोचन किया।
इस मौके पर उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जिक्र करते हुए कहा कि वह भारत की आध्यात्मिक विरासत पर भरोसा करते थे। उनका मानना था कि यह उन चुनौतियों का सामना करने में मदद कर सकती है, जो आज मानवता के सामने खड़ी हैं।