दिल्ली के गैंगरेप के बाद जनमानस में जबरदस्त आक्रोश है, इसके मद्देनजर बलात्कारियों को फांसी पर लटकाने की मांग जोर पकड़ चुकी है। हालांकि इसके पहले फांसी तक पहुंचने से पूर्व कई बलात्कारी अभयदान पाते रहे हैं। ऐसा एक मामला मेरठ का भी है, जिसमें दुष्कर्म पीड़ित बालिका का पिता न्याय की लंबी जंग जीतने के बावजूद हार गया। इकलौती बेटी के बलात्कारी को सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा होने के बावजूद वह उसे फांसी पर लटकता नहीं देख सका। यदि बलात्कारी को फांसी पर लटकाया गया होता, तो बलात्कारियों के लिए एक बड़ा सबक होता।
सरधना थाना क्षेत्र के एक गांव में पांच वर्षीय बच्ची से 16 अगस्त 2001 को स्कूल से घर जाते समय साइकिल पर घर पहुंचाने के बहाने गन्ने के खेत में दुष्कर्म किया गया था। दुष्कर्मी ने पहचान लिए जाने पर बच्ची की गला दबाकर हत्या कर दी थी। इस मामले में गांव के सतीश के खिलाफ अपहरण और बलात्कार कर हत्या करने का मामला दर्ज कराया था। इस मामले में 29 अक्तूबर 2010 को एडीजे षष्टम कु. विजयलक्ष्मी ने बलात्कारी को फांसी की सजा सुनाई थी। इस पर बलात्कारी ने हाईकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया।
इसके बाद पीड़ित पिता ने इकलौती बेटी के हत्यारे को सजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी 05 लोवर कोर्ट द्वारा दी गई सजा पर मुहर लगा दी। इसके बाद दोषी ने राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दायर की, जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने गृह विभाग की रिपोर्ट के आधार पर 30 जून 2012 पूरे देश के 30 दोषियों की फांसी की सजा उम्रकैद में बदल दी, इन्हीं दोषियों में सतीश भी शामिल था। इससे बच्ची का पिता न्याय की लंबी लड़ाई जीतकर भी हार गया। इसके बाद से दुष्कर्मी सतीश आगरा जेल में उम्रकैद काट रहा है।
राष्ट्रपति भवन पर धरना
'बेटी के बलात्कारी की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली, तो मुझे लगा कि न्याय नहीं मिल पाया। कारण, जीवन की कमाई करीब पांच लाख रुपये मुकदमे की पैरवी में लगा दिए। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी, मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव सभी को पत्र लिखा, जिसका कोई जवाब नहीं आया। अब दिल्ली गैंगरेप कांड को लेकर जब स्वयं राष्ट्रपति फांसी की हिमायत कर रहे हैं, तो उन्हें भी उम्मीद जगी है। वह इसके लिए राष्ट्रपति भवन पर धरना देंगे और फांसी की सजा देने की मांग करेंगे।'
- बलात्कार पीड़िता बच्ची का पिता