पांच साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार खाद्य सुरक्षा कानून लागू हो गया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा पर अध्यादेश को मंजूरी दे दी। इसके जरिए देश की दो तिहाई आबादी को सस्ते अनाज पर कानूनी हक दे दिया गया है।
केंद्रीय खाद्य मंत्री केवी थॉमस के अनुसार छह महीने के अंदर इस कार्यक्रम को लागू किया जाएगा। इसके लिए सभी राज्यों को लाभार्थियों की पहचान करने की तैयारी शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
कांग्रेस ने खाद्य सुरक्षा कानून को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा है कि इससे देश में भुखमरी का नामोनिशान ही हट जाएगा। जबकि विपक्ष और सपा ने इसका पुरजोर विरोध किया है।
राष्ट्रपति सचिवालय को बृहस्पतिवार रात अध्यादेश मिला था। अटकलें थी कि विपक्ष के विरोध के चलते राष्ट्रपति इस पर जल्द हस्ताक्षर नहीं करेंगे। लेकिन शुक्रवार को उन्होंने इसे मंजूरी दे दी।
सरकार हर साल देश की 67 फीसदी आबादी को करीब 6.2 करोड़ टन चावल, गेहूं या मोटे अनाज की आपूर्ति पर करीब 1 लाख 25 हजार करोड़ खर्च करेगी।
‘कांग्रेस वोट की राजनीति के लिए यह कर रही है। लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अध्यादेश लाया गया है। कांग्रेस की मंशा सही नहीं है। मेरी पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहेगी कि किसानों के हितों का नुकसान नहीं हो।’ --मुलायम सिंह यादव, सपा प्रमुख
‘यह बिल कई लोगों के लिए जीवन बचाने और जीवन बदलने वाला साबित होगा। भगवान जाने कि इसमें एक मिनट की देरी से भी न जाने कितनी जानों को कीमत चुकानी पड़ेगी। इससे सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा।’--अजय माकन, कांग्रेस महासचिव
‘यह एक राजनीतिक चाल है। इसे नौ साल से पारित क्यों नहीं किया गया। छत्तीसगढ़ मॉडल इससे कई गुना बेहतर है।’--कैप्टन अभिमन्यु, भाजपा प्रवक्ता