राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बेटी और पत्नी की हत्या में मौत की सजा पाए सैबन्ना निन्गप्पा नाटिकर की दया याचिका को खारिज कर दिया है। राष्ट्रपति पद संभालने के बाद मुखर्जी ने दूसरी दया याचिका खारिज की है। इसके पहले पिछले साल नवंबर में उन्होंने मुंबई आतंकी हमले के दोषी लश्कर आतंकी अजमल कसाब की दया याचिका को खारिज किया था। इसके बाद कसाब को महाराष्ट्र के पुणे में येरवदा जेल में फांसी पर लटका दिया गया था।
राष्ट्रपति भवन के बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति सचिवालय ने 4 जनवरी को नाटिकर की दया याचिका को खारिज कर दिया। नाटिकर वर्तमान समय में कर्नाटक की बेलगाम केंद्रीय जेल में बंद है। राष्ट्रपति संसद हमले में दोषी मोहम्मद अफजल गुरू समेत नौ दया याचिकाओं को गृह मंत्रालय को पुनर्विचार के लिए लौटा चुके हैं।
अफजल गुरू को संसद पर हमले के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। संविधान की धारा 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी भी अपराध में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को क्षमादान देने, सजा को निलंबित रखने, सजा को कम करने का अधिकार हासिल है। दया याचिका पर फैसला लेने के लिए गृहमंत्रालय राष्ट्रपति सचिवालय के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करता है।
राष्ट्रपति ने पिछले साल नवंबर में अतबीर की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। अतबीर को 1996 में संपत्ति विवाद में अपनी सौतेली मां, सौतेली बहन और सौतेले भाई की हत्या के आरोप में 2004 में सेशन कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी। सेशन कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट ने बरकरार रखा था।