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राष्ट्रपति ने खारिज की अंतिम दया याचिका, होगी फांसी

Fri, 16 Aug 2013 04:30 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को अंतिम दया याचिका पर फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया। इसके साथ ही प्रणब मुखर्जी 11 दया याचिकाएं खारिज कर 17 दोषियों को मृत्युदंड देने वाले पहले राष्ट्रपति बन गए हैं।
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प्रणब मुखर्जी से पहले पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा (1992-1997) के बीच अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान कुल 14 दया याचिकाएं खारिज की थीं। मुखर्जी ने 13 महीनों में इन याचिकाओं का निपटारा कर दिया।

टीओआई के मुताबिक एक लड़की की रेप के बाद हत्या मामले में राष्ट्रपति ने दो अपराधियों को सुनाए सुप्रीम कोर्ट के मृत्युदंड के फैसले को बरकरार रखते हुए दया याचिका खारिज कर दी। इसके बाद अब राष्ट्रपति के पास कोई दया याचिका लंबित नहीं है।
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यह आखिरी मामला साल 2001 का है, कर्नाटक के रहने वाले शिवु और जडेस्वामी ने एक 18 साल की लड़की से रेप के बाद उसकी नृशंस हत्या कर दी थी। हाइकोर्ट ने साल 2005 में इन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी और साल 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकृति दे दी थी।

तब शिवु की ओर से उनकी मां चेलम्मा और अन्य पहचान के लोगों ने गृह मंत्रालय के समक्ष दया याचिका लगाई। गृह मंत्रालय ने भी इस मामले में अप्रैल 2013 को याचिका खारिज कर दी थी। मामला जून 2013 में राष्ट्रपति के पास चला गया और उन्होंने गृह मंत्रालय की सलाह पर इसे खारिज कर दिया।

कसाब और अफजल गुरू को हुई फांसी
इससे पहले 22 जुलाई को भी राष्ट्रपति ने मध्य प्रदेश के रहने वले मगनलाल की दया याचिका खारिज की थी। मगनलाल को साल 2010 में अपनी पांच बेटियों की हत्या कर दी थी।

प्रणब मुखर्जी के ही कार्यकाल में 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में पकड़े गए आतंकी अजमल आमिर कसाब की दया याचिका खारिज की गई थी। कसाब को नवंबर 2012 में फांसी दे दी गई थी। इसके बाद संसद पर आतंकी हमले के दोषी अफजल गुरू की याचिका खारिज होने के बाद तीन फरवरी को उसे भी फांसी दे दी गई थी।
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