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गांगुली के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में केंद्र सरकार

Fri, 20 Dec 2013 12:42 AM IST
एजेंसी/दिल्ली
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केंद्र सरकार जस्टिस एके गांगुली को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति के रेफरेंस का सहारा ले सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट के जांच पैनल ने पहली ही नजर में जस्टिस गांगुली को लॉ इंटर्न के साथ ‘अवांछनीय व्यवहार’ का दोषी पाया था।

माना जा रहा है कि कानून और गृह मंत्रालय इस बात पर राजी हो गए हैं कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज गांगुली के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनाया जा सकता है।

यही वजह है कि इसके कानूनी पहलुओं पर विचार करने के लिए इसे अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती के पास भेज दिया गया है।

राष्ट्रपति के रेफरेंस के लिए भेजे जाने वाले किसी मसले को सरकार के आला कानूनी अफसर के पास भेजने का मतलब ही यह है कि इसमें खामी की कोई गुंजाइश न बचे। तभी यह सुप्रीम कोर्ट के सामने टिक सकेगा।

गृह मंत्रालय ने कुछ दिन पहले ही यह मामला कानून मंत्रालय को भेजा था। यह कदम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से गृह मंत्रालय को ममता बनर्जी का पत्र भेजने के बाद उठाया गया था।
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ममता बनर्जी ने जस्टिस गांगुली को पश्चिम बंगाल के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने के लिए ही राष्ट्रपति को यह पत्र लिखा था। जस्टिस गांगुली पर एक महिला लॉ इंटर्न के साथ यौन दुर्व्यवहार का आरोप था।
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हालांकि जस्टिस गांगुली ने इस आरोप से इनकार किया है और पद छोड़ने से इनकार कर दिया है। राष्ट्रपति के रेफरेंस को सुप्रीम कोर्ट में पेश करने से पहले कैबिनेट की मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद ही इसे राष्ट्रपति को भेजा जा सकेगा।

मानवाधिकार सुरक्षा कानून में यह साफ है कि राष्ट्रीय या राज्यों के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्षों को राष्ट्रपति के रेफरेंस से हटाया जा सकता है।
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